Он тарки парии чеҳра ки дӯш аз бар мо рафт
آن تُرکِ پَری چِهره که دوش اَز بَرِ ما رَفت
Оё чаҳ хато дид ки аз роҳ хато рафт ?
آیا چه خطا دید که اَز راهِ خطا رَفت؟
То рафт маро аз назари он чашми ҷаҳони байн
تا رَفت مَرا اَز نَظَر آن چَشمِ جَهانبین
Каси воқиф мо нест ки аз дида чаҳ ҳо рафт
کَس واقفِ ما نیست که اَز دیده چهها رَفت
Бар шамъ нарафт аз гузари оташи дил , дӯш
بَر شَمع نرفت اَز گُذرِ آتشِ دل، دوش
Он дӯд ки аз сӯзи ҷигар бар сар мо рафт
آن دود که اَز سوزِ جِگر بَر سَر ما رَفت
Давр аз рухи ту дам ба дам аз гӯшаи чашмам
دور اَز رُخِ تو دَم به دَم از گوشهٔ چَشمَم
Сайлоб сиришк омаду тӯфон бало рафт
سیلابِ سِرشک آمَد و طوفانِ بَلا رَفت
Аз пой фитодем чу омад ғами ҳиҷрон
از پای فُتادیم چو آمَد غَمِ هجران
Дар дард бамурдем чу аз даст даво рафт
دَر دَرد بِمُردیم چو اَز دَست دَوا رَفت
Дил гуфт висолаш ба дуои боз тавон ёфт
دل گفت وِصالَش به دُعا باز تَوان یافت
Умрӣаст ки умрами ҳама дар кор дуо рафт
عُمریست که عُمرَم همه دَر کارِ دُعا رَفت
Эҳром чаҳ бандем ? чу он қибла на ин ҷост
اِحرام چه بَندیم؟ چو آن قبله نه این جاست
Дар саъй чаҳ кӯшем ? чу аз Марва сафо рафт
دَر سَعی چه کوشیم؟ چو از مَروه صَفا رَفت
Дай гуфт табиб аз сари ҳасрат чу маро дид
دی گفت طبیب اَز سَرِ حَسرت چو مَرا دید
Ҳайҳот ки ранҷи ту зи қонӯн шифо рафт
هِیهات که رَنجِ تو زِ قانونِ شَفا رَفت
эй дӯст ба пурсидани ҳофизи қадамӣ на
ای دوست به پُرسیدنِ حافظ قَدَمی نِه
Зон пеш ки гӯйанд ки аз дор фано рафт
زان پیش که گویند که اَز دارِ فَنا رَفت