Соқии биё ки ёри зи рух парда барграфт
ساقی بیا که یار ز رخ پرده برگرفت
Кори чароғи хилватён боз даргирифт
کارِ چراغ خلوتیان باز درگرفت
Он шамъи саргирифта дигар чеҳра барфурӯхт
آن شمعِ سرگرفته دگر چهره برفروخت
Венаи пери солхурдаи ҷавонии з сар гирифт
وین پیرِ سالخورده جوانی ز سر گرفت
Он ишва дод ишқ ки муфтии з раҳ бирафт
آن عشوه داد عشق که مفتی ز ره برفت
Ваон лутф кард дӯст ки душман ҳазар гирифт
وان لطف کرد دوست که دشمن حذر گرفت
Зинҳор аз он иборати ширини длФриб
زنهار از آن عبارتِ شیرینِ دلفریب
Гӯйӣ ки пистаи ту сухан дар шукр гирифт
گویی که پستهٔ تو سخن در شکر گرفت
Бори ғамӣ ки хотири мо хаста карда буд
بارِ غمی که خاطرِ ما خسته کرده بود
Исои дамии худои бФрстод ва барграфт
عیسیدمی خدا بفرستاد و برگرفت
Ҳар сарвқад ки бар мау хур ҳасан ме фурухт
هر سروقد که بر مَه و خور حسن میفروخت
Чун ту даромадии паии корӣ дигар гирифт
چون تو درآمدی پیِ کاری دگر گرفت
Зини қиссаи ҳафт гунбади афлоки пурсадост
زین قصه هفت گنبدِ افلاک پرصداست
Кӯтаҳ назар бибин ки сухан мухтасар гирифт
کوتهنظر ببین که سخن مختصر گرفت
Ҳофизи ту ин сухани з ки омухтӣ ? ки бахт
حافظ تو این سخن ز که آموختی؟ که بخت
Тъўиз кард шеъри туро ва ба зар гирифт
تعویذ کرد شعرِ تو را و به زر گرفت