Алшкри сайди вқиди алнъми азои самъати савти алшкри тأҳити ллмзиди азои аҳби аллоҳи ъбдои абтлоءи ?фони сабри аҷтбоаҳ ваон шукри астФоءи бъзҳми ишкрўни аллоҳи лқҳраҳу бъзҳми ишкрўнаҳи ллтФаҳу кули воҳиди мнҳмои хайри лони алшкртриқои иқлби алқҳр лутфан алъоқли алкомли ҳўи алзии ишкри алии алҷФоءи фии алҳзўру алхФоءи Фҳўолзии астФоаҳи аллоҳу ани кони муродаи дараки алнори Фболшкри истъҷли мақсӯдаи лони алшкўии аззоҳири тнқиси лшкўии алботни қоли алайҳи алслми анои алзҳўки алқтўл яъне зҳкии фии ваҷҳи алҷоФии қатли ?лаи волмроди ман алзҳки алшкри макони алшкоиаҳу ҳакии ани иҳўдёи кони фии ҷўороҳди ман асҳоби расӯли аллоҳу кони алиҳўдии алии ғурфаи инзли минҳои алоҳдоси волонҷоси вобўоли алсбёну ғсили алсёби илои байтаи вҳўи ишкри алиҳўдӣу ёмри аҳлаи болашкару мзии алии ҳозои смони синӣн ҳатто моти алмслми Фдхли алиҳўдии лиъзии аҳлаи қрأии фии албити тлки алнҷосоти врои манофизҳо ман алғрФаҳи феълами мо ҷирии фии алмдаҳи алмозиаҳ вандам надамо шадидани вқоли лоҳлаҳи виҳкми лами лами тхбрўнӣу доимои кантами тшкрўнии қолўои анаи кони иأмрнои болашкару иҳдднои ани тарки алшкри Фомни алиҳўдӣ . Байти шеър : зикри некони мҳрз некӣаст ҳамчуи мутриб ки боис сикӣасту лиҳозои зкроллаҳи фии алқуръони анбёءаҳу солеҳии ибоду шкрҳми алии мо Фълўоу лмни қадару ғФр . Шукри мзидни пистон неъматаст пистон агарчӣ пар буд то нмзӣ шер наёяд . Пурсед ки « сабаб ношукрӣ чисту онч монеъ шукраст чист ? » шайх фармуд монеъи шукри хом тамаъӣаст ки онч бадв расед беш аз он тамаъ карда буд он тамаъи хом ӯро бар он дошт чун аз ончи дили ниҳода буд камтар расед монеъ шукр шуд пас аз айби худ ғофил буд ва он нақд ки пеш каш кард аз айб ва аз зёФти он ғофил буд лоҷарами тамаъи хоми ҳамчуи мива ӣ хом хӯрданасту нони хому гӯшти хом . Пас лоҷарами мӯҷиби таваллуд иллат бошаду таваллуди ношукрӣ . Чун донист ки музир хӯрд истифроғ воҷибаст . Ҳақи таъолӣ ба ҳикмати хештан ӯро ба бешукрӣ мубтало кард то истифроғ кунад ва аз он пиндошти фосид фориғ шавад то он як иллати сад иллат нашавад вблўноҳми болҳсноти волсиӣоти лълҳми ирҷъўн яъне рзқноҳми ман ҳайси лоиҳтсбўни вҳўи алғибу итнФри нзрҳми ани рؤиаҳи алосбоби алтии ҳаии колшри коءллаҳи комаи қоли Абуязид ёрб мо ашркти бки қоли аллоҳи таъолӣ ё абоизиди влолилаҳи аллбни қиллати зоти лайлаи аллбни азрнии воноолзори алноФъи Фнзри илои алсбби Фъдаҳи аллоҳи мшркоу қоли аноолзори бъдоллбн ва қабл аллбни локини ҷаълати аллбни колзнбу алмзраҳи колтأдиби ман алостози Фозои қоли алостози лотأкли алФўокаҳи Фокли алтлмизу зарби алстози алии кафи раҷулаи лоисҳи ани иқўли аклти алФўокаҳи Фозри раҷулӣу алии ҳзоолосли ман ҳифзи лисонаи ани алшрки такаффули аллоҳи ани итҳри рӯҳаи ани ағроси алшрки алқлили ъндоллаҳи ксиролФрқи байни алҳмду алшкри ани алшкри алии нъми лоиқоли шкртаҳи алии ҷамолау алии шуҷоатаи волҳмдоъм .

الشکرُ صیدٌ وقید النعّم اِذا سمعت صوتَ الشکر تأهیتَ للمزید اِذا اَحبّ اللهّ عبداً ابتلاءُ فَان صبرَ اِجتباهُ وان شکرَ اصطفاءُ بعضهم یشکرون اللهّ لِقهره و بَعضهم یَشکرونَهُ لِلطفهِ و کلُّ واحِدٍ منهما خیرٌ لِاَنّ الشکرتریقاٌ یُقلّب القهر لطفاً العاقل الکامل هُوَ الذی یشکرُ علی الجفاء فی الحضور و الخفاء فَهوُالذیّ اصطفاه اللّه و ان کان مُرادهُ دَرَک الناّر فبالشکر یَستعجل مقصودهُ لان اَلشکوی الظاهر تنقیص لشکوی الباطن قالَ علیه السّلم اَنَا الضّحوکُ القتول یعنی ضحکی فی وجه الجافی قتلُ لَهُ وَالمراد مِنَ الضحک الشکرُ مَکان الشکایة و حکی اَنّ یَهودیّاً کان فی جواراَحدٍ من اصحاب رسول اللهّ و کانَ الیهودیُّ عَلی غُرفةٍ ینزل منها الاحداثُ والاَنجاس وابوال الصبیان و غَسیل الثیّاب اِلی بیتهِ وهو یشکر الیهودیَّ و یامُر اَهلهُ بِالشکر وَ مضی عَلی هذا ثمان سِنینَ حَتی ماتَ المسلم فدَخَل الیهودی لیعزی اهله قَرأی فی البیت تلک النجاساتِ ورآی مَنافِذَها مِن الغرفة فعلم ما جَری فی المدةِّ الماضیة وَنَدِم ندماً شدیداً وقال لِاَهلهِ ویحکم لِمَ لم تُخبرونی و دایماً کنتم تَشکرونی قالوا انهّ کان یَأمُرنا بِالشکّر و یُهددنّا عن ترکِ الشکر فَآمَنَ الیهودی.ّ بیت شعر: ذکر نیکان مُحرض نیکی است   همچو مطرب که باعث سیکی است و لهذا ذکراللهّ فی القرآن انبیاءهُ و صالحی عِباد و شکرَهُم عَلی ما فَعلوا و لمن قَدر و غَفر. شکر مزیدن پستان نعمت است پستان اگرچه پر بوَد تا نَمِزی شیر نیاید. پرسید که «سبب ناشکری چیست و آنچ مانع شکرست چیست؟» شیخ فرمود مانع شُکر خام‌طمعی است که آنچ بدو رسید بیش از آن طمع کرده بود آن طمع خام او را بر آن داشت چون از آنچ دل نهاده بود کمتر رسید مانع شکر شد پس از عیب خود غافل بود و آن نقد که پیش‌کش کرد از عیب و از زیافت آن غافل بود لاجرم طمع خام همچو میوه‌ی خام خوردن است و نان خام و گوشت خام. پس لاجرم موجب تولّد علّت باشد و تولّد ناشکری. چون دانست که مضرّ خورد استفراغ واجب است. حقّ تعالی به حکمت خویشتن او را به بی‌شکری مبتلا کرد تا استفراغ کند و از آن پنداشت فاسد فارغ شود تا آن یک علّت صد علّت نشود وَبَلَوْنَاهُمْ بِالْحَسَنَاتِ وَالسَیئّآتِ لَعَلهُّم یَرْجِعُوْنَ یعنی رزقناهُم من حیث لایحتسبونَ وهوَ الغیب و یَتنفرُّ نَظرهم عن رؤیَةِ الاسباب التی هی کَالشر کَاءللّه کما قال ابویزید یارَب ما اشرکت بُک قال اللهّ تعالی یا ابایزید ولالیلة اللبّن قلتَ ذاتَ لیلةٍ اللّبن اَضرّنی واناالضّار النّافع فنظر الی السبب فعدهُّ اللّهُ مُشرکاً و قال اَنَاالضّار بعداللبّن و قبل اللّبن لکن جعلتُ اللّبن کالذنب و المضّرة کالتأدیب من الاُستاذ فاذا قال الاستاذ لاتأکل الفواکه فاکل التلمیذ و ضربَ الُستاذ علی کفٌ رجله لایصحّ ان یقول اَکَلتُ الفواکه فاضرّ رَجلی و علی هذاالاصل من حفظ لسانه عن الشّرک تکفل اللّه ان یُطهّر روحَه عَن اغراس الشرّک القلیلُ عنداللهّ کثیرالفرق بین الحمد و الشکّر اَنّ اَلشکر علی نِعمٍ لایقال شَکرتهُ علی جماله و علی شجاعَتِهِ والحمداعم.