Сад ҳазорон марди тарсои сӯй ӯ
صد هزاران مرد ترسا سوی او
Андаки андак ҷамъ шуд дар кӯй ӯ
اندکاندک جمع شد در کوی او
ӯ баён мекард бо эшон броз
او بیان میکرد با ایشان به راز
Сари англиўну зуннору намоз
سِرّ انگلیون و زنّار و نماز
ӯ ба зоҳири воъизи аҳком буд
او به ظاهر واعظ اَحکام بود
Лек дар ботини сафиру дом буд
لیک در باطن صفیر و دام بود
Баҳри ин баъзе саҳоба аз расӯл
بهر این بعضی صَحابه از رسول
Мултамис буданд макри нафаси ғӯл
مُلتمِس بودند مکرِ نفسِ غول
Кӯ чаҳомезад зи ағрози ниҳон
کو چه آمیزد ز اغراض نهان
Дар ибодатҳо ва дар ихлоси ҷон
در عبادتها و در اخلاصِ جان
Фазли тоъатро нҷстндии азу
فضلِ طاعت را نجُستَندی ازو
Айби зоҳирро бҷстндӣ ки кӯ
عیب ظاهر را بجُستندی که کو؟
Мӯ ба мӯу зарраи зарраи макри нафас
مو به مو و ذرّه ذره مکرِ نَفس
Май шносиднд чун гул аз карафс
میشناسیدند چون گُل از کرفس
Мӯшикофони саҳобаи ҳам дар он
موشکافانِ صحابه هم در آن
Ваъзи эшон хираи гаштандии бҷон
وعظِ ایشان خیره گشتندی به جان