Бас дарозаст ин ҳадиси хоҷаи гӯ

بس دراز است این‌، حدیث خواجه گو

То чаҳ шуд аҳволи он марди накӯ

تا چه شد احوال آن مرد نکو

Хоҷаи андари оташу дарду ҳнин

خواجه اندر آتش و درد و حنین

Сад пароканда ҳаме гуфт ин чунин

صد پراکنده همی‌گفت این چنین

Гуҳи таноқузи гоҳи нозу гуҳи ниёз

گه تناقض گاه ناز و گه نیاز

Гоҳи савдои ҳақиқати гуҳи муҷоз

گاه سودای حقیقت گه مجاز

Мард ғарқа гашта ҷонӣ ме кунад

مرد غرقه گشته جانی می‌کند

Дастро дар ҳар гиёҳӣ ме занад

دست را در هر گیاهی می‌زند

То кадомаш даст гирад дар хатар

تا کدامش دست گیرد در خطر

Даст ва пое мезанад аз бими сар

دست و پایی می‌زند از بیم سر

Дӯст дорад ёри ин ошуфтагӣ

دوست دارد یار این آشفتگی

Кӯшиши беҳуда ба аз хуфтагӣ

کوشش بیهوده به از خفتگی

Онк ӯ шоҳаст ӯ бекор нест

آنک او شاهست او بی کار نیست

Нола аз ваии турфаи кӯ бемор нест

ناله از وی طرفه کو بیمار نیست

Баҳр ин фармуд раҳмон эй писар

بهر این فرمود رحمان ای پسر

Кули явми ҳўи фии шан эй писар

کل یوم هو فی شان ای پسر

Андарин раҳ май тарош ва май харош

اندرین ره می‌تراش و می‌خراش

То дами охири дамӣ фориғ мабош

تا دم آخر دمی فارغ مباش

То дами охири дамии охир буд

تا دم آخر دمی آخر بود

Ки аноят бо ту соҳиби сар буд

که عنایت با تو صاحب‌ سِر بود

Ҳар чаҳ мекӯшанд агар мард ва занаст

هر چه می‌کوشند اگر مرد و زنست

Гӯшу чашми шоҳи ҷон бар равзанаст

گوش و چشم شاه جان بر روزنست

Хониш
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