Гуфт ъФритӣ ки тахташро ба фан

گفت عفریتی که تختش را به فن

Ҳозири орм то ту зини маҷлис шудан

حاضر آرم تا تو زین مجلس شدن

Гуфт осифи ман ба исми аъзамаш

گفت آصف من به اسم اعظمش

Ҳозири орми пеши ту дар як дамаш

حاضر آرم پیش تو در یک دمش

Гарчи ъФрити Авестоади саҳар буд

گرچه عفریت اوستاد سحر بود

Лек он аз нафхи осиф рӯ намӯд

لیک آن از نفخ آصف رو نمود

Ҳозир омад тахти билқиси он замон

حاضر آمد تخت بلقیس آن زمان

Лек зи осиф на аз фани ъФритён

لیک ز آصف نه از فن عفریتیان

Гуфт ҳамдоллаи барин ва сад чунин

گفت حمدالله برین و صد چنین

Ки бдидстми зи раби Алъоламин

که بدیدستم ز رب العالمین

Пас назар кард он сулаймони сӯии тахт

پس نظر کرد آن سلیمان سوی تخت

Гуфт ореи гӯлгирӣ эй дарахт

گفت آری گول‌گیری ای درخت

Пеши чӯбу пеши санг нақш кунад

پیش چوب و پیش سنگ نقش‌کَند

эй басои гӯлон ки сарҳо ме ниҳанд

ای بسا گولان که سرها می‌نهند

Соҷду масҷуд аз ҷон бе хабар

ساجد و مسجود از جان بی‌خبر

Дида аз ҷони ҷунбишии вондки асар

دیده از جان جنبشی واندک اثر

Дида дар вақте ки шуд ҳайрону днг

دیده در وقتی که شد حیران و دنگ

Ки сухан гуфт ва ишорат кард санг

که سخن گفت و اشارت کرد سنگ

Нарад хизмат чун ба номавзеи ббохт

نرد خدمت چون به ناموضع بباخت

Шери сангинро шқии ширии шинохт

شیر سنگین را شقی شیری شناخت

Аз карами шер ҳақиқӣ кард ҷӯад

از کرم شیر حقیقی کرد جود

Устихонии сӯии саги андохти зуд

استخوانی سوی سگ انداخت زود

Гуфт гарчи нест он саг бар қавом

گفت گرچه نیست آن سگ بر قوام

Лек моро устихон Лутфӣаст ом

لیک ما را استخوان لطفیست عام