Рӯзи ошурои ҳамаи аҳли ҳалаб
روز عاشورا همه اهل حلب
Боби антокиаҳи андар то ба шаб
باب انطاکیه اندر تا به شب
Гирд ояд марду зани ҷамъии азим
گرد آید مرد و زن جمعی عظیم
Мотами он хонадон дорад муқӣм
ماتم آن خاندان دارد مقیم
Нола ва навҳа кунанд андари бко
ناله و نوحه کنند اندر بکا
Шиъаи ошуро барои Карбало
شیعه عاشورا برای کربلا
Бшмрнди он зулмҳоу имтиҳон
بشمرند آن ظلمها و امتحان
Каз язид ва шимур дид он хонадон
کز یزید و شمر دید آن خاندان
Наъра ҳоашон меравад дар ?вилу вшт
نعرههاشان میرود در ویل و وشت
Пар ҳаме гардад ҳамаи саҳроу дашт
پر همیگردد همه صحرا و دشت
Як ғарибии шоирӣ аз раҳ расед
یک غریبی شاعری از ره رسید
Рӯзи ошуро ва он афғон шунид
روز عاشورا و آن افغان شنید
Шаҳрро бгзошт ва он сӯ рой кард
شهر را بگذاشت و آن سو رای کرد
Қасди ҷусту ҷӯии он ҳайҳои кард
قصد جست و جوی آن هیهای کرد
Пресс прессон мешуд андари аФтқод
پرس پرسان میشد اندر افتقاد
Чист ин ғам бар ки ин мотам фитод
چیست این غم بر که این ماتم فتاد
Ин раис зафт бошад ки бамурд
این رئیس زفت باشد که بمرد
Ин чунин маҷмаъ набошад кори хирад
این چنین مجمع نباشد کار خرد
Ном ӯу алқоб ӯ шарҳам диҳед
نام او و القاب او شرحم دهید
Ки ғарибами ман шумо аҳл даҳ ед
که غریبم من شما اهل ده اید
Чист ному пешау авсоф ӯ
چیست نام و پیشه و اوصاف او
То бигӯям марсияи зи алтоф ӯ
تا بگویم مرثیه ز الطاف او
Марсияи созам ки марди шоирам
مرثیه سازم که مرد شاعرم
То азинҷои баргу лолнгӣ барам
تا ازینجا برگ و لالنگی برم
Он яке гуфташ ки ҳаии девона Эй
آن یکی گفتش که هی دیوانهای
Ту нае шиъаи адуи хона Эй
تو نهای شیعه عدوّ خانهای
Рӯзи ошуро наме доне ки ҳаст
روز عاشورا نمیدانی که هست
Мотами ҷонӣ ки аз қарнӣ бааст
ماتم جانی که از قرنی بهست
Пеши муъмин кӣ буд ин ғуссаи хор
پیش مؤمن کی بود این غصه خوار
Қадари ишқи гӯши ишқи гӯшвор
قدر عشق گوش عشق گوشوار
Пеши муъмини мотами он поки рӯҳ
پیش مؤمن ماتم آن پاکروح
Шуҳра тар бошад зи сад тӯфони Нӯҳ
شهرهتر باشد ز صد طوفان نوح