Биор соқии бодати фидои сару дастор
بیار ساقی بادت فدا سر و دستار
з ҳар куҷо ки диҳад дасти ҷоми ҷони дасти ор
ز هر کجا که دهد دست جام جان دست آر
Дарои масту хиромону соғари андари даст
درآی مست و خرامان و ساغر اندر دست
Равои мубин чу ту соқӣ ва мо чунин ҳушёр
روا مبین چو تو ساقی و ما چنین هشیار
Биор ҷом ки ҷонами зи орзӯмандӣ
بیار جام که جانم ز آرزومندی
зи хеш низ баромад чаҳ ҷои сабру қарор
ز خویش نیز برآمد چه جای صبر و قرار
Биор ҷоми ҳаётӣ ки ҳам мизоҷ туаст
بیار جام حیاتی که هم مزاج توست
Ки мӯниси дили хастаи сету муҳаррами асрор
که مونس دل خستهست و محرم اسرار
Аз он шароб кигар ҷуръае аз ӯ бчкд
از آن شراب که گر جرعهای از او بچکد
зи хок шӯра бирӯяд ҳамон замони гулзор
ز خاک شوره بروید همان زمان گلزار
Шароби лаъл кигар ним шаби براردи ҷӯш
شراب لعل که گر نیم شب برآرد جوش
Миёни чарху замин пар шавад аз ӯ анвор
میان چرخ و زمین پر شود از او انوار
Зиҳии шаробу зиҳии соғару зиҳии соқӣ
زهی شراب و زهی ساغر و زهی ساقی
Ки ҷонҳоу равонҳо нисори боди нисор
که جانها و روانها نثار باد نثار
Биё ки дар дили ман розҳои пинҳонаст
بیا که در دل من رازهای پنهانست
Шароб лаъл бигардону парда Эй магузор
شراب لعل بگردان و پردهای مگذار
Маро чу маст кунӣ онгаҳе тамошо кун
مرا چو مست کنی آنگهی تماشا کن
Ки шергири чгўнст дар миёни шикор
که شیرگیر چگونست در میان شکار
Табораки аллоҳи он дам ки пар шавад маҷлис
تبارک الله آن دم که پر شود مجلس
зи буии ҷому зи нури рухи чунон дилдор
ز بوی جام و ز نور رخ چنان دلدار
Ҳазор маст чу парвонаи ҷониби он шамъ
هزار مست چو پروانه جانب آن شمع
Ниҳодаи ҷон ба тибқ бар ки ин бигир ва биор
نهاده جان به طبق بر که این بگیر و بیار
зи мутрибони хуши овозу наъраи мисатон
ز مطربان خوش آواز و نعره مستان
Шароб дар раги хумор гум кунад рафтор
شراب در رگ خمار گم کند رفتار
Бибин ба ҳоли ҷавонони Каҳф кон хӯрданд
ببین به حال جوانان کهف کان خوردند
Хароби сесад ва на соли масти андари ғор
خراب سیصد و نه سال مست اندر غار
Чаҳ бода буд ки Мӯсо ба соҳирони дррихт
چه باده بود که موسی به ساحران درریخت
Ки даст ва пой бидоданд масту бихўдўор
که دست و پای بدادند مست و بیخودوار
Занони Миср чаҳ диданд бар рухи Юсуф
زنان مصر چه دیدند بر رخ یوسف
Ки шарҳа шарҳа буриданд соид чу нигор
که شرحه شرحه بریدند ساعد چو نگار
Чаҳ рехти соқии тақдис бар сари Љорҷис
چه ریخت ساقی تقدیس بر سر جرجیس
Ки ғам нахурд ва натарсед зи оташи куффор
که غم نخورد و نترسید ز آتش کفار
Ҳазор бориш киштанд ва пештар ме рафт
هزار بارش کشتند و پیشتر میرفت
Ки мастам ва хабарам нест аз яке ва ҳазор
که مستم و خبرم نیست از یکی و هزار
Саҳобӣон ки бараҳна ба пеш теғ шуданд
صحابیان که برهنه به پیش تیغ شدند
Хароб ва маст баданд аз Муҳамади мухтор
خراب و مست بدند از محمد مختار
Ғалати Муҳамад соқӣ набӯд ҷомӣ буд
غلط محمد ساقی نبود جامی بود
Пар аз шаробу худо буд соқии Аброр
پر از شراب و خدا بود ساقی ابرار
Кадом шарбат нӯшед пӯраи адҳам
کدام شربت نوشید پوره ادهم
Ки маст вор шуд аз малику мамлакати безор
که مست وار شد از ملک و مملکت بیزار
Чаҳ скр буд ки овоз дод субҳонӣ
چه سکر بود که آواز داد سبحانی
Ки гуфт рамзи аноолҳқ ва рафт бар сари дор
که گفت رمز اناالحق و رفت بر سر دار
Ба буи он мешуд оби равшану софӣ
به بوی آن میشد آب روشن و صافی
Чу масти саҷда кунон меравад ба сӯии баҳор
چو مست سجده کنان میرود به سوی بحار
зи ишқ ин мехокаст гашта ранг омез
ز عشق این می خاکست گشته رنگ آمیز
зи туфи ин меоташ фурухт хуши рухсор
ز تف این می آتش فروخت خوش رخسار
Вагар на бод чаро гашти ҳамдаму ғаммоз
وگر نه باد چرا گشت همدم و غماز
Ҳаёти сабзау бустону дафтари гуфтор
حیات سبزه و بستان و دفتر گفتار
Чаҳ завқ доранд ин чори асли зи омезиш
چه ذوق دارند این چار اصل ز آمیزش
Наботу мардуму ҳайвони натиҷаи ин чор
نبات و مردم و حیوان نتیجه این چار
Чаҳ беҳшонаҳ меӣ дорад ин шаби зангӣ
چه بیهشانه میی دارد این شب زنگی
Ки халқро ба яке ҷом май барад аз кор
که خلق را به یکی جام میبرد از کار
зи лутфу санъати сонеъи кадомро гӯям
ز لطف و صنعت صانع کدام را گویم
Ки баҳри қудрат ӯро падед нест канор
که بحر قدرت او را پدید نیست کنار
Шароб ишқ банушему бори ишқи кашем
شراب عشق بنوشیم و بار عشق کشیم
Чунонк уштури сармаст дар миёни қатор
چنانک اشتر سرمست در میان قطار
На масте ки туро орзӯӣ ақл ояд
نه مستیی که تو را آرزوی عقل آید
зи мастӣ ки кунад рӯҳу ақлро бедор
ز مستی که کند روح و عقل را بیدار
з ҳар чаҳ дорад ғайри худо шукуфа кунад
ز هر چه دارد غیر خدا شکوفه کند
Аз онки ғайр худо нест ҷузи сдоъу хумор
از آنک غیر خدا نیست جز صداع و خمار
Куҷои шароби таҳуру куҷо май ангур
کجا شراب طهور و کجا می انگور
Таҳур об ҳаётаст ва он дигар мурдор
طهور آب حیاتست و آن دگر مردار
Дамӣ чу хӯку замонӣ чу бўзнаҳ кунадат
دمی چو خوک و زمانی چو بوزنه کندت
Ба оби сурхи сияҳ рӯй гардии охири кор
به آب سرخ سیه روی گردی آخر کار
Диласт хнби шароби худо сараш бигушо
دلست خنب شراب خدا سرش بگشا
Сараш ба гул бигирифтаст табъи бдкрдор
سرش به گل بگرفتست طبع بدکردار
Чу андакии сари хамро з гул кунӣ холӣ
چو اندکی سر خم را ز گل کنی خالی
Барояд аз сари хами бӯ ва сад ҳазор осор
برآید از سر خم بو و صد هزار آثار
Агар даройами косори он Фрўшмрм
اگر درآیم کآثار آن فروشمرم
Шумор он натавон кард то ба рӯзи шумор
شمار آن نتوان کرد تا به روز شمار
Чу оҷизем балои аҳсиии фурӯди орем
چو عاجزیم بلا احصیی فرود آریم
Чу гашти вақти Фрўдошти ҷом ҷон бурдор
چو گشت وقت فروداشت جام جان بردار
Дро ба маҷлиси ушшоқи шамси табризӣ
درآ به مجلس عشاق شمس تبریزی
Ки офтоб аз он шамс май баради анвор
که آفتاب از آن شمس میبرد انوار