Чунон мастами чунон мастами ман имрӯз

چنان مستم چنان مستم من امروز

Ки аз чанбари буруни ҷустами ман имрӯз

که از چنبر برون جستم من امروز

Чунон чизе ки дар хотири наёбад

چنان چیزی که در خاطر نیابد

Чнонстми чнонстми ман имрӯз

چنانستم چنانستم من امروز

Ба ҷон бо осмон ишқ рафтам

به جان با آسمان عشق رفتم

Ба сӯратгар дар ин пастами ман имрӯз

به صورت گر در این پستم من امروز

Гирифтам гӯши ақл ва гуфтам эй ақл

گرفتم گوش عقل و گفتم ای عقل

Буруни рӯ каз ту ворстми ман имрӯз

برون رو کز تو وارستم من امروز

Бишӯй эй ақли дасти хеш аз ман

بشوی ای عقل دست خویش از من

Ки дар маҷнӯни бпиўстми ман имрӯз

که در مجنون بپیوستم من امروز

Ба дастам дод он Юсуфи туранҷӣ

به دستم داد آن یوسف ترنجی

Ки ҳар ду дасти худ хстми ман имрӯз

که هر دو دست خود خستم من امروز

Чунонам кард он абриқ пурмай

چنانم کرد آن ابریق پر می

Ки чандин хнб бишикастам ман имрӯз

که چندین خنب بشکستم من امروز

намедонам куҷоем лек фаррух

نمی‌دانم کجایم لیک فرخ

Мақомӣ кандар ӯ ҳастам ман имрӯз

مقامی کاندر او هستم من امروز

Биёмад бар дирами иқболи нозон

بیامد بر درم اقبال نازان

зи мастӣ дар бар ӯ бастами ман имрӯз

ز مستی در بر او بستم من امروز

Чу вогшт ӯ пай ӯ май давидам

چو واگشت او پی او می‌دویدم

Дамӣ аз пои нншстми ман имрӯз

دمی از پای ننشستم من امروز

Чу нҳни ақрбм маълум омад

چو نحن اقربم معلوم آمد

Дигар худро бнпрстми ман имрӯз

دگر خود را بنپرستم من امروز

Мабанд он зулфи шамси аддӣни табриз

مبند آن زلف شمس الدین تبریز

Ки чун моҳӣ дар ин шастами ман имрӯз

که چون ماهی در این شستم من امروز

Хониш
ғзл шморҳ 1185 — мҳсн лӣлҳ квҳӣ
ғзл шморҳ 1185 — ъндлӣб