Алии аллоҳ эй мусулмонон аз он ҳиҷрони пуроташ
علی الله ای مسلمانان از آن هجران پرآتش
Зломи фии зломи ман фироқи алҳби қади ағтш
ظلام فی ظلام من فراق الحب قد اغطش
Чу давр афтод моҳии ҷони з баҳр афтод дар ҳила
چو دور افتاد ماهی جان ز بحر افتاد در حیله
Комаи ҳути алшқии алиўми фии арзи алФлоинбш
کما حوت الشقی الیوم فی ارض الفلاینبش
Аҷаб набӯд агар ошиқ шавад беҷон дар ин ҳиҷрон
عجب نبود اگر عاشق شود بیجان در این هجران
Азои мо алҳўти золи алмоءи лои таъаҷҷуби бони тътш
اذا ما الحوت زال الماء لا تعجب بان تعطش
Агар мункир шавад мардии зи сӯзи ошиқи сӯзон
اگر منکر شود مردی ز سوز عاشق سوزان
Маттии имтози айни алшмси ман айни ?лаи аъамаш
متی یمتاز عین الشمس من عین له اعمش
Чу фарш васл бардорад шифо аз манзили ошиқ
چو فرش وصل بردارد شفا از منزل عاشق
Фарроши ман лаҳиби алнори ман таҳти улфатии иФрш
فراش من لهیب النار من تحت الفتی یفرش
Ки то пайғоми он Юсуфи бад-ӣни ёқӯб ишқ ояд
که تا پیغام آن یوسف بدین یعقوب عشق آید
Ибрди зоку албстону алФрдўси истнъш
یبرد ذاک و البستان و الفردوس یستنعش
Дилам дар гӯш ман гуяд зи ҳирси васли шамси аддӣн
دلم در گوش من گوید ز حرص وصل شمس الدین
Илои табризи истсъӣу фии табризи истФтш
الی تبریز یستسعی و فی تبریز یستفتش