Бунае сабзи хинги ман фарози осмонҳо сам

بنه ای سبز خنگ من فراز آسمان‌ها سم

Ки бинишаст он маи зебо чу сад танги шукри пешам

که بنشست آن مه زیبا چو صد تنگ شکر پیشم

Равон шуд сӯии мо кавсари пар аз шеру пар аз шукр

روان شد سوی ما کوثر پر از شیر و پر از شکر

Бадарони машки саққоро бизан сангӣ ва башикан хам

بدران مشک سقا را بزن سنگی و بشکن خم

Яке оҳӯии ҷонпарвар баромад аз биёбоне

یکی آهوی جان پرور برآمد از بیابانی

Ки шери нари зи бим ӯ занад бар реги сӯзони дам

که شیر نر ز بیم او زند بر ریگ سوزان دم

Ҳама мастем эй хоҷа ба рӯз ид ме монад

همه مستیم ای خواجه به روز عید می ماند

Дуҳули масту дҳлзни маст ва бихўд мезанад лами лам

دهل مست و دهلزن مست و بیخود می زند لم لم

Даромад ақл дар майдони сари ангушт дар дандон

درآمد عقل در میدان سر انگشت در دندان

Ки бо сармаст ва бо ҳайрон чаҳ гуфтам ман ки алҳокм

که با سرمست و با حیران چه گفتم من که الهاکم

Яке оқили миёни мо ба дору ҳам наме ёбад

یکی عاقل میان ما به دارو هم نمی‌یابد

Дар ин занҷири маҷнӯнон чаҳ маҷнӯн мешавад мардум

در این زنجیر مجنونان چه مجنون می شود مردم

Ба назд ман яке соғар ба аз сад хонаи пурзар

به نزد من یکی ساغر به از صد خانه پرزر

Бирезам бар тани лоғар аз он бодаи яке қмқм

بریزم بر تن لاغر از آن باده یکی قمقم

Миёни рӯзаи дорони хуши шароби ид дар май каш

میان روزه داران خوش شراب عید در می کش

На он мастӣ ки шаби оеи зи тарси халқ чун кздм

نه آن مستی که شب آیی ز ترس خلق چون کزدم

Бихӯр бератл ва бекӯза меӣ кӯи бишиканади рӯза

بخور بی‌رطل و بی‌کوزه میی کو بشکند روزه

На з ангурасту неи шираи не аз тзғўи не аз гандум

نه ز انگورست و نی شیره نی از طزغو نی از گندم

Шаробии не ки дрризии саҳар махмур бархезӣ

شرابی نی که درریزی سحر مخمور برخیزی

Дуруғинаст он бода аз он афтодаи кӯтаҳи дам

دروغین است آن باده از آن افتاده کوته دم

Даҳон барбанду муҳаррами шӯ ба каъбаи хомашон май рӯ

دهان بربند و محرم شو به کعبه خامشان می رو

Паёпаии андари ин мастии неи уштури ҷӯу неи ҷами ҷам

پیاپی اندر این مستی نی اشتر جو و نی جم جم

Хониш
ғзл шморҳ 1440 — ъндлӣб