Хизмати шамси ҳақу дайни ёдгорати соқио

خدمتِ شمس حق و دین  باد کارت  ساقیا

Бодаи гардон , чист охири дордорти соқио ?

باده گردان، چیست آخر داردارت ساقیا ؟

Соқии глрхи з май ин ақли моро хор на

ساقیِ گلرخ ز می این عقلِ ما را خار نه

То бигардади ҷумлаи гули ин хорхорти соқио

تا بگردد جمله گل این خارخارت ساقیا

Ҷом чун товус парон кун ба гирди боғи базм

جامِ چون طاووس پرّان کن به گِردِ باغِ بزم

То чу товусӣ шавад ин заҳру морати соқио

تا چو طاووسی شود این زهر و مارت ساقیا

Корро бигзор майро бор кун бар асби ҷом

کار را بگذار می را بار کن بر اسبِ جام

То з кайвон бугзарад ин кору борати соқио

تا ز کیوان بگذرد این کار و بارت ساقیا

То ту бошӣ дар азизиҳо ба банди худ дарӣ

تا تو باشی در عزیزی‌ها به بندِ خود دَری

намекунад эй сахти ҷони хокии хорати соқио

می‌کُند ای سخت‌جان خاکیِ خوارت ساقیا

Чашма ӣ равоқ майро наҳл бигушо сӯии айш

چشمه‌ی رواقِ می را نحل بگشا سوی عیش

То з чашма мешавад ҳар чашму чорати соқио

تا ز چشمه مَی‌ شود هر چشم و چارَت ساقیا

Ақли номаҳрами буруни рони ту зи хилват зон шароб

عقلِ نامحرم برون ران تو ز خلوت زان شراب

То намояди он санами рухсори норти соқио

تا نماید آن صنم رخسارِ نارت ساقیا

Бихўдӣ аз мебигир ва аз худии рӯ бар канор

بیخودی از می بگیر و از خودی رو بر‌کنار

То бигирад дар канори хеши ёрати соқио

تا بگیرد در کنارِ خویش یارت ساقیا

Ту шӯй аз даст , бинии айши худро бар канор

تو شَوی از دست، بینی عیشِ خود را بر کنار

Чун бигирад дар бар симини канорати соқио

چون بگیرد در برِ سیمین کنارت ساقیا

Гоҳи тугирӣ ба бар дар ёрро аз бихўдӣ

گاه تو گیری به بر در یار را از بیخودی

Чунк бихўдтр шудӣ гирад канорати соқио

چونک بیخودتر شدی گیرد کنارت ساقیا

Аз май табриз гардон кун паёпаии ратл ҳо

از میِ تبریز گردان‌کن پیاپی رطل‌ها

То бабради торҳои чанги орати соқио

تا بِبُرّد تارهای چنگِ عارت ساقیا

Хониш
ғзл шморҳ 149 — прӣ соткнӣ ъндлӣб
ғзл шморҳ 149 — орш хӣрободӣ