Биёи комрўзи берун аз ҷаҳонам
بیا کامروز بیرون از جهانم
Биёи комрўзи ман аз худ ниҳонам
بیا کامروز من از خود نهانم
Гирифтам дашнае ваз худ буридам
گرفتم دشنهای وز خود بریدم
На он худ на он дигаронам
نه آنِ خود نه آنِ دیگرانم
Ғалат кардам нбридми ман аз худ
غلط کردم نبریدم من از خود
Ки ин тадбир бе ман кард ҷонам
که این تدبیر بیمن کرد جانم
Надонам котши дил бар чаҳ сон аст
ندانم کآتشِ دل بر چه سان است
Ки дигари шакл май сӯзади забонам
که دیگر شکل میسوزد زبانم
Ба сад сӯрат бидидам хештан ро
به صد صورت بدیدم خویشتن را
Ба ҳар сӯрат ҳаме гуфтам ман онам
به هر صورت همیگفتم من آنم
Ҳаме гуфтам марои сад сӯрат омад
همیگفتم مرا صد صورت آمد
Ва ё сӯрат неам ман бе нишонам
و یا صورت نیام من بینشانم
Ки сӯратҳои дил чун меҳамонанд
که صورتهای دل چون میهمانند
Ки меоянд ва ман чун хонаи бонам
که میآیند و من چون خانه بانم