Гар аз ғами ишқ ор дорем

گر از غم عشق عار داریم

Пас мо ба ҷаҳон чаҳ кор дорем

پس ما به جهان چه کار داریم

ё раби ту мадаи қарори мо ро

یا رب تو مده قرار ما را

Гар бе рухи ту қарор дорем

گر بی‌رخ تو قرار داریم

эй Юсуфи Юсуфони куҷое

ای یوسف یوسفان کجایی

Мо рӯй дар он диёр дорем

ما روی در آن دیار داریم

Ҳар субҳ бар он ду зулфи мишкӣн

هر صبح بر آن دو زلف مشکین

Чун боди сабо гузор дорем

چون باد صبا گذار داریم

Чун ҳалқаи зулфи худ шуморӣ

چون حلقه زلف خود شماری

Мо чашм дар он шумор дорем

ما چشم در آن شمار داریم

Чашми ту шикор кард ҷон ро

چشم تو شکار کرد جان را

Мо дида дар он шикор дорем

ما دیده در آن شکار داریم

эй оби ҳаёт дар канорат

ای آب حیات در کنارت

Ин оташ аз он канор дорем

این آتش از آن کنار داریم

Зон лолаи ситон чаҳ зор гаштем

زان لاله ستان چه زار گشتیم

ё раб ки чаҳ лола зор дорем

یا رب که چه لاله زار داریم

Гӯйем зи рашки шамси табриз

گوییم ز رشک شمس تبریز

Неи сим ва на зар на ёр дорем

نی سیم و نه زر نه یار داریم

Хониш
ғзл шморҳ 1550 — ъндлӣб