Имрӯзи маро чаҳ шуд чаҳ донам

امروز مرا چه شد چه دانم

Имрӯзи ман аз сабки длонм

امروز من از سبک دلانم

Дар дидаи ақли баси мкинм

در دیدهِ عقل بس مَکینم

Дар дидаи ишқ бе маконам

در دیدهِ عشق بی‌مَکانم

Афсӯс ки сокини заминам

افسوس که ساکن زمینم

Инсоф ки сорми замонам

اِنصاف که صارمِ زمانم

Ин турфа ки бо тани заминӣ

این طُرفه که با تَنِ زمینی

Бар пушти фалаки ҳамеи давонам

بر پشتِ فلک همی‌دَوانم

Он бор ки чарх барнатобад

آن بار که چرخ برنتابد

Аз қӯти ишқ май кшонм

از قُوَتِ عشق می‌کِشانم

Аз синаи хеши оташаш ро

از سینه خویش آتشش را

То синаи санг май расонам

تا سینهٔ سنگ می‌رِسانم

Аз лиззат ва аз сафои қандаш

از لذت و از صفای قندش

Пуршаҳд шудаи сети ин даҳонам

پُر شَهد شده‌ست این دهانم

Аз мушкили шамси ҳақи табриз

از مشکلِ شمسِ حقِ تبریز

Ман нуктаи мушкили ҷаҳонам

من نکته مشکلِ جهانم

Хониш
ғзл шморҳ 1567 — ъндлӣб