Макун эй дӯсти ғарибами сари савдоӣ ту дорам
مکن ای دوست غریبم، سر سودای تو دارم
Ману болои минора ки таманноӣ ту дорам
من و بالای مناره، که تمنّای تو دارم
зи ту сармасту хуморами хабар аз хеш надорам
ز تو سرمست و خمارم، خبر از خویش ندارم
Сари худ низ нхорм ки тақозоӣ ту дорам
سر خود نیز نخارم، که تقاضای تو دارم
Дили ман равшану мқбли з чаҳ шуд бо ту бигӯям
دل من روشن و مُقبِل ز چه شد؟ با تو بگویم
Ки дар ин оинаи дили рухи зебоӣ ту дорам
که در این آینهٔ دل رخ زیبای تو دارم
Макун эй дӯст маломат бингар рӯзи қиёмат
مکن ای دوست ملامت، بنگر روز قیامت
Ҳамаи мавҷами ҳамаи ҷӯшам дар дарёӣ ту дорам
همه موجم، همه جوشم، دُرِّ دریای تو دارم
Машну қавли табибон ки шукр зояд сафро
مشنو قول طبیبان که شِکر زاید صَفرا
Ба шукри доруӣ ман кун чаҳ ки сафроӣ ту дорам
به شِکر داروی من کن چه که صفرای تو دارم
Ҳиллае гунбад гардун бишинав қиссаам акнӯн
هله، ای گنبدِ گردون، بشنو قصّهام اکنون
Ки чу ту ҳамраҳи моҳам бару паҳноӣ ту дорам
که چو تو همره ماهم، بَر و پهنای تو دارم
Бар дарбон ту оем надиҳади роҳ ва баранд
برِ دربان تو آیم، ندهد راه و بِراند
Хабараш нест ки пинҳон чаҳ тамошоӣ ту дорам
خبرش نیست که پنهان، چه تماشای تو دارم!
зи дирам роҳ набошад зи сари бому дарича
ز درم راه نباشد، ز سر بام و دریچه
Стар аллоҳи ълино чаҳ ълолоӣ ту дорам
سَتَر الله عَلَینٰا چه عَلالای تو دارم!
Ҳиллаи дарбони ъўони хуи мдҳми роҳу сиқти гӯ
هله، دربانِ عوانخو، مدهم راه و سقط گو
Чу дафам май зан бар рӯи дафу срноӣ ту дорам
چو دفم میزن بر رو، دف و سُرنای تو دارم
Чу даф аз силии мутриби ҳунарам беш намояд
چو دف از سیلیِ مطرب هنرم بیش نماید
Бизан ва таҷриба мекун ҳамаи ҳайҳои ту дорам
بزن و تجربه میکن همه هیهای تو دارم
Ҳиллаи зин пас нахурӯшам накунам фитнаи нҷўшм
هله،زین پس نخروشم، نکنم فتنه نجوشم
Ба дилами ҳукм кӣ дорад дил гуёӣ ту дорам
به دلم حکم کی دارد؟! دل گویای تو دارم