Ба кӯии ишқи ту ман номдм ки бозрўм
به کوی عشق تو من نامدم که بازروم
Чигуна қиблаи гузорам чу дар намози рӯм
چگونه قبله گذارم چو در نماز روم
Биҷуз ки кӯр нахоҳад ки ман ба ҳеҷ сабаб
به جز که کور نخواهد که من به هیچ سبب
Ба сӯии зулмат аз он шамъи сдтрози рӯм
به سوی ظلمت از آن شمع صد طراز روم
Кадоми ақл раво бинад ин ки ман ташна
کدام عقل روا بیند این که من تشنه
Ба ғайри ҳазрати он баҳр бе ниёзи рӯм
به غیر حضرت آن بحر بینیاز روم
Барроқ ишқ гузидам ки то ба даври абад
براق عشق گزیدم که تا به دور ابد
Ба сӯии турраи ҳиндӯ ба тарк тоз рӯм
به سوی طره هندو به ترکتاز روم
Шаб чу бозу бти рӯзро бисӯзад пар
شب چو باز و بط روز را بسوزد پر
Чу дар саҳар ба муноҷот ӯ ба рози рӯм
چو در سحر به مناجات او به راز روم
Чу чашми банди қазои роҳи чашм баста кунад
چو چشمبند قضا راه چشم بسته کند
Ба буии анбаряши чашмҳо Фрозрўм
به بوی عنبریش چشمها فرازروم
Ба хоки пои худованди шамси табризӣ
به خاک پای خداوند شمس تبریزی
Ки чун шудам зи вай аз дасти сарфарози рӯм
که چون شدم ز وی از دست سرفراز روم