Шуд зи ғамати хонаи савдои дилам
شد ز غمت خانهٔ سودا دلم
Дар талабат рафт ба ҳар ҷои дилам
در طلبت رفت به هر جا دلم
Дар талаби Зуҳраи рухи моҳи рӯ
در طلب زُهرهرخِ ماهرو
наменигарад ҷониби болои дилам
مینگرد جانب بالا دلم
Фарши ғамаши гаштаму охири зи бахт
فرش غمش گشتم و آخر ز بخت
Рафт бар ин сақфи мусаффои дилам
رفت بر این سقف مصفا دلم
Оҳ ки имрӯзи диламро чаҳ шуд ?
آه که امروز دلم را چه شد!
Дӯш чаҳ гуфтааст касе бо дилам ?
دوش چه گفته است کسی با دلم؟
Аз талаби гавҳар гуёӣ ишқ
از طلب گوهر گویای عشق
Мавҷ занад мавҷ чу дарёи дилам
موج زند موج چو دریا دلم
Рӯз шуду чодари шаб май дард
روز شد و چادر شب میدَرَد
Дар паии он айшу тамошои дилам
در پی آن عیش و تماشا دلم
Аз дили ту дар дили ман нукта ҳост
از دل تو در دل من نکتههاست
Аҳ чаҳ раҳаст аз дили ту то дилам
اه چه ره است از دل تو تا دلم
Гар накунӣ бар дили ман раҳматӣ
گر نکنی بر دل من رحمتی
Вои дилами вои дилами вои дилам
وای دلم وای دلم وا دلم
эй табриз аз ҳаваси шамси дайн
ای تبریز از هوس شمس دین
Чанд равад сӯии сурайёи дилам
چند رود سوی ثریا دلم