Он дилбари айёри ҷгрхўораҳи мо кӯ
آن دلبر عیار جگرخواره ما کو
Он хусрави ширини шкрпораҳи мо кӯ
آن خسرو شیرین شکرپاره ما کو
Бесӯрат ӯ маҷлиси моро намакӣ нест
بیصورت او مجلس ما را نمکی نیست
Он пурнамаку пурфану айёраи мо кӯ
آن پرنمک و پرفن و عیاره ما کو
Борӣк шудаи сет аз ғам ӯ моҳи фалак низ
باریک شدهست از غم او ماه فلک نیز
Он Зуҳра бо баҳраи сайёраи мо кӯ
آن زهره با بهره سیاره ما کو
Пурбаста чу Њорутаму лаби ташна чу морут
پربسته چو هاروتم و لب تشنه چو ماروت
Он рашк чаҳ Бобули сҳораҳи мо кӯ
آن رشک چه بابل سحاره ما کو
Мӯсо ки дар ин хушки биёбон ба Асое
موسی که در این خشک بیابان به عصایی
Сад чашма равон кард аз ин хораи мо кӯ
صد چشمه روان کرد از این خاره ما کو
Зини панҷ ҳасани зоҳиру зини панҷ ҳасани сар
زین پنج حسن ظاهر و زین پنج حسن سر
Даҳ чашмаи гушоянда дар ин қорраи мо кӯ
ده چشمه گشاینده در این قاره ما کو
Аз фурқати он дилбар дардӣаст дар ин дил
از فرقت آن دلبر دردی است در این دل
Он доруии дарди дил ва он чораи мо кӯ
آن داروی درد دل و آن چاره ما کو
Астораҳи рӯз ӯаст чу бар май ндмди субҳ
استاره روز او است چو بر میندمد صبح
Гӯям ки бидам гуяд костораҳи мо кӯ
گویم که بدم گوید کاستاره ما کو
Андар зулмотаст Хизр дар талаби об
اندر ظلمات است خضر در طلب آب
Кони айни ҳаёти хуши фаввораи мо кӯ
کان عین حیات خوش فواره ما کو
Ҷони ҳамчу масӣҳӣаст ба гаҳвораи қолаб
جان همچو مسیحی است به گهواره قالب
Он Марям банданда гаҳвораи мо кӯ
آن مریم بندنده گهواره ما کو
Он ишқи пар аз сӯрат бе сӯрати олам
آن عشق پر از صورت بیصورت عالم
Ҳам дузи зи мо ҳам зиҳи қавораи мо кӯ
هم دوز ز ما هم زه قواره ما کو
Ҳар кунҷи яке пурғам махмур нишаста сет
هر کنج یکی پرغم مخمور نشستهست
Кони соқии дарёдили хумораи мо кӯ
کان ساقی دریادل خماره ما کو
Он зинда кун ин дару девори бадани кӯ
آن زنده کن این در و دیوار بدن کو
Ва он равнақи сақф ва дару дрсораҳи мо кӯ
و آن رونق سقف و در و درساره ما کو
Ливома ва аммора баҷанганд шабу рӯз
لوامه و اماره بجنگند شب و روز
Ҷанги афкани ливомау аммораи мо кӯ
جنگ افکن لوامه و اماره ما کو
Мо мушти гулӣ дар кафи қудрати мутаққаллиб
ما مشت گلی در کف قدرت متقلب
Аз ғифлат худ гуфта ки гули кораи мо кӯ
از غفلت خود گفته که گل کاره ما کو
Шамс алҳақ табриз куҷо рафт ва куҷо нест
شمس الحق تبریز کجا رفت و کجا نیست
Ва андари пай ӯ он дили овораи мо кӯ
و اندر پی او آن دل آواره ما کو