Ба ҷони ту ки Марв аз миёни кори мхсб

به جان تو که مرو از میان کار مخسب

зи умри як шаб кам гиру зиндаи дори мхсб

ز عمر یک شب کم گیر و زنده دار مخسب

Ҳазор шаби ту барои ҳавоӣ худ хуфтӣ

هزار شب تو برای هوای خود خفتی

Яке шабӣ чаҳ шавад аз барои ёри мхсб

یکی شبی چه شود از برای یار مخسب

Барои ёри латифӣ ки шаб наме хусбад

برای یار لطیفی که شب نمی‌خسبد

Мувофиқат куну дилро бадв сипор мхсб

موافقت کن و دل را بدو سپار مخسب

Битарс аз он шаби ранҷуре ки ту то рӯз

بترس از آن شب رنجوریی که تو تا روز

Фиғон ва ёрб ва ёрб кунӣ ба зори мхсб

فغان و یارب و یارب کنی به زار مخسب

Шабӣ ки марг бияёд қнқ курк гуяд

شبی که مرگ بیاید قنق کرک گوید

Ба ҳақи талхии он шаб ки раҳ сипор мхсб

به حق تلخی آن شب که ره سپار مخسب

Аз он злозли ҳайбат ки санг об шавад

از آن زلازل هیبت که سنگ آب شود

Агар ту санг нае он ба ёди ори мхсб

اگر تو سنگ نه‌ای آن به یاد آر مخسب

Агар чаҳ зангии шаби сахт соқӣ чустаст

اگر چه زنگی شب سخت ساقی چستست

Мгири ҷоми вайу тарс аз он хумори мхсб

مگیر جام وی و ترس از آن خمار مخسب

Худоӣ гуфт ки шаб дӯстон наме хусбанд

خدای گفت که شب دوستان نمی‌خسبند

Агар хаҷал шудае зину шармсори мхсб

اگر خجل شده‌ای زین و شرمسار مخسب

Битарс аз он шаби сахти азим бе зинҳор

بترس از آن شب سخت عظیم بی‌زنهار

Захираи сози шабиро ва зинҳор мхсб

ذخیره ساز شبی را و زینهار مخسب

Шунидае ки маони комҳо ба шаб ёбанд

شنیده‌ای که مهان کام‌ها به شب یابند

Барои ишқи шаҳаншоҳи комёри мхсб

برای عشق شهنشاه کامیار مخسب

Чу мағз хушк шавад тоза мағзят бахшад

چو مغز خشک شود تازه مغزیت بخشد

Ки ҷумлаи мағзи шӯй эй умедвори мхсб

که جمله مغز شوی ای امیدوار مخسب

Ҳазор борат гуфтам хамӯш ва судат нест

هزار بارت گفتم خموش و سودت نیست

Яке биору ивази гири сад ҳазор мхсб

یکی بیار و عوض گیر صد هزار مخسب

Хониш
ғзл шморҳ 312 — прӣ соткнӣ ъндлӣб
ғзл шморҳ 312 — орш хӣрободӣ
ғзл шморҳ 312 — нознӣн бозӣон