Биё ки ошиқ моҳаст ваз ахтарон пайдост

بیا که عاشق ماهست وز اختران پیداست

Бдонки масти таҷаллӣ ба моҳ роҳ намост

بدانک مست تجلی به ماه راه نماست

Миёни рӯзи шутур бар сар минора равад

میان روز شتر بر سر مناره رود

Ҳар онк гуяд кӯи кӯ бдонк нобӣност

هر آنک گوید کو کو بدانک نابیناست

Бигард ошиқ агар сад ҳазор хом буд

بگرد عاشق اگر صد هزار خام بود

Марои ду чашм бабандӣ бигӯямат ки куҷост

مرا دو چشم ببندی بگویمت که کجاست

Биё ба пеши ман о то ба гӯш ту гӯям

بیا به پیش من آ تا به گوش تو گویم

Ки аз даҳону лаби ман парӣ рухӣ гуёст

که از دهان و لب من پری رخی گویاست

Касе ки ошиқ рӯй парӣ ман бошад

کسی که عاشق روی پری من باشد

Назодааст зи одам на модараш ҳаввост

نزاده است ز آدم نه مادرش حواست

Аҷаби мадор аз он кас ки моҳи моро дид

عجب مدار از آن کس که ماه ما را دید

Чу офтоб дар оташ чу чарх бесар ва пост

چو آفتاب در آتش چو چرخ بی‌سر و پاست

Сари бурӣдаи нигар дар миёни хӯни ғалатон

سر بریده نگر در میان خون غلطان

Дамӣ қарор надорад магари сари иҳёст

دمی قرار ندارد مگر سر یحیاست

ӯ офтоб ва чу моҳаст он сар бе тан

او آفتاب و چو ماهست آن سر بی‌تن

Ки рӯзу шаби мутаққаллиб дар ин нишебу ълост

که روز و شب متقلب در این نشیب و علاست

Бар ин бисоти хирадро агар хирад будӣ

بر این بساط خرد را اگر خرد بودی

Биёмадӣ ва бигуфтӣ ки ин чаҳ короФзост

بیامدی و بگفتی که این چه کارافزاست

Касе ки чеҳра дил дид ӯст аҳли хирад

کسی که چهره دل دید اوست اهل خرد

Касе ки қомат ҷон ёфт ӯст коҳил салост

کسی که قامت جان یافت اوست کاهل صلاست

Дар ин чаман назарӣ кун ба заъфарони рӯйон

در این چمن نظری کن به زعفران رویان

Ки рӯй зарду дили дарди доғ он симост

که روی زرد و دل درد داغ آن سیماست

Хамӯш бош магӯ роз агар хиради дорӣ

خموش باش مگو راز اگر خرد داری

зи мо хиради матлаб то парии мо бо мост

ز ما خرد مطلب تا پری ما با ماست

Ки баради муфаххари табризи шамси табризӣ

که برد مفخر تبریز شمس تبریزی

Хиради зи ҳалқаи мағзам ки сахт ҳалқа рибост

خرد ز حلقه مغزم که سخت حلقه رباست

Хониш
ғзл шморҳ 475 — ъндлӣб