Чаҳ буиаст ин чаҳ буиаст ин магари он ёр ме ояд
چه بویست این چه بویست این مگر آن یار میآید
Магари он ёри гули рухсор аз он гулзор ме ояд
مگر آن یار گل رخسار از آن گلزار میآید
Шабӣ ё пардаи авдӣ ва ё машки ъбрсўдӣ
شبی یا پرده عودی و یا مشک عبرسودی
Ва ё Юсуфи бад-ӣни зӯдӣ аз он бозор ме ояд
و یا یوسف بدین زودی از آن بازار میآید
Чаҳ нураст ин чаҳ тобаст ин чаҳ моҳ ва офтобаст ин
چه نورست این چه تابست این چه ماه و آفتابست این
Магари он ёри хилвати ҷӯи зи кӯҳ ва ғор ме ояд
مگر آن یار خلوت جو ز کوه و غار میآید
Сабуӣ май чаҳ май ҷӯии даҳонашро чаҳ май бӯе
سبوی می چه میجویی دهانش را چه میبویی
Ту пиндорӣ ки ӯ чун ту аз ин хумор ме ояд
تو پنداری که او چون تو از این خمار میآید
Чаҳ нуқсони офтобиро агар танҳо равад дар раҳ
چه نقصان آفتابی را اگر تنها رود در ره
Чаҳ нуқсони ҳишмати маро ки бедастор ме ояд
چه نقصان حشمت مه را که بیدستار میآید
Чаҳ хӯрд ин дил дар он маҳфил ки ҳамчун масти андари гул
چه خورد این دل در آن محفل که همچون مست اندر گل
Аз он майхона чун мисатон чаҳ ноҳамвор ме ояд
از آن میخانه چون مستان چه ناهموار میآید
Мхсби имшаби мхсби имшаби қавомаши гир ва дарёбаш
مخسب امشب مخسب امشب قوامش گیر و دریابش
Ки ӯ дар ҳалқаи мисатони чунин бисёр ме ояд
که او در حلقه مستان چنین بسیار میآید
Гулистон мешавад олам чу сурӯш мекунад сайрон
گلستان میشود عالم چو سروش میکند سیران
Қиёмат мешавад зоҳир чу дар изҳор ме ояд
قیامت میشود ظاهر چو در اظهار میآید
Ҳама чун нақш деворем ва ҷунбон мешавем он дам
همه چون نقش دیواریم و جنبان میشویم آن دم
Ки нури нақши банди мо бар ин девор ме ояд
که نور نقش بند ما بر این دیوار میآید
Гуҳӣ дар кӯии беморон чу ҷолинус ме гардад
گهی در کوی بیماران چو جالینوس میگردد
Гуҳӣ бар шакли беморон ба ҳиялат зор ме ояд
گهی بر شکل بیماران به حیلت زار میآید
Хамаш кардам хамаш кардам ки ин девони шеъри ман
خمش کردم خمش کردم که این دیوان شعر من
зи шарми он парии чеҳра ба истиғфор ме ояд
ز شرم آن پری چهره به استغفار میآید