Ошиқ чу манӣ бояд май сӯзад ва ме созад

عاشق چو منی باید می‌سوزد و می‌سازد

Вари не мисли кӯдак то каъб ҳаме бозад

ور نی مثل کودک تا کعب همی‌بازد

Маи рӯ чу тӯй бояд эй моҳи ғуломи ту

مه‌رو چو تویی باید ای ماه غلام تو

То бар ҳамаи маи рӯйон май чарбад ва ме нозад

تا بر همه مه رویان می‌چربد و می‌نازد

Ошиқ чу манӣ бояд каз мастӣ ва бе хешӣ

عاشق چو منی باید کز مستی و بی‌خویشی

Бо халқи нпиўндд бо хеши напардозад

با خلق نپیوندد با خویش نپردازد

Форс чу тӯй бояд эй шоҳи савори ман

فارس چو تویی باید ای شاه سوار من

Каз ваҳму гумон зон сӯ меронад ва ме тозад

کز وهم و گمان زان سو می‌راند و می‌تازد

Ишқи об ҳаёт омад брҳондт аз мурдан

عشق آب حیات آمد برهاندت از مردن

эй шоҳ ки ӯ худро дар ишқ дарандозад

ای شاه که او خود را در عشق دراندازد

Чун шох зараст ин ҷон май каш ба худаш май дон

چون شاخ زرست این جان می‌کش به خودش می‌دان

Чандон ки кашиш бинад сӯии ту ҳамеи ёзд

چندان که کشش بیند سوی تو همی‌یازد

Бории дилу ҷон ман мастаст дар он маъдан

باری دل و جان من مستست در آن معدن

Ҳар рӯз чу нўъшқони фарҳанги нави оғозад

هر روز چو نوعشقان فرهنگ نو آغازد

Чун чанги шӯй аз ғам хам дода вонгаҳ ӯ

چون چنگ شوی از غم خم داده وانگه او

Дар бар кашадат ширин бевосита бинавозад

در بر کشدت شیرین بی‌واسطه بنوازد

Он оҳӯии мафтӯнаш чун тоза шавад хунаш

آن آهوی مفتونش چون تازه شود خونش

Он шер бидон оҳӯ дар майманаи бгрозд

آن شیر بدان آهو در میمنه بگرازد

Шамс алҳақ табризӣ бар шамси фалаки рӯзӣ

شمس الحق تبریزی بر شمس فلک روزی

Бошад ки тарози нави шъшоъи ту бтрозд

باشد که طراز نو شعشاع تو بطرازد

Хониш
ғзл шморҳ 629 — ъндлӣб