Омад бути майхона то хонаи баради мо ро
آمد بت میخانه تا خانه برد ما را
Бинмуд баҳори нав то тоза кунад мо ро
بنمود بهار نو تا تازه کند ما را
Бикшод нишон худ барбаст миёни худ
بگشاد نشان خود بربست میان خود
Пар кард камони худ то роҳ занад мо ро
پر کرد کمان خود تا راه زند ما را
Сад нукта дарандозад сад дом ва дағал созад
صد نکته دراندازد صد دام و دغل سازد
Сад нарад аҷаб бозад то хуш бихӯрад мо ро
صد نرد عجب بازد تا خوش بخورد ما را
Рӯи сояи сурӯши шӯи пеш ва пас ӯ май ду
رو سایه سَروَش شو پیش و پس او میدو
Гарчи чу дарахти нав аз бен бикунади мо ро
گرچه چو درخت نو از بن بکند ما را
Гар ҳаст дилаш хоро магрезу Марви ёро
گر هست دلش خارا مگریز و مرو یارا
Коўли бикашади мороу охири бикашади мо ро
کاول بُکشد ما را و آخر بِکشد ما را
Чун ноз кунад ҷонони андари дили мо пинҳон
چون ناز کند جانان اندر دل ما پنهان
Бар ҷумлаи султонони сад ноз расад мо ро
بر جمله سلطانان صد ناز رسد ما را
Бозомад ва бозомад он умр дароз омад
بازآمد و بازآمد آن عمر دراز آمد
Он хӯбӣ ва ноз омад то доғ наад мо ро
آن خوبی و ناز آمد تا داغ نهد ما را
Он ҷон ва ҷаҳон омад ваон ганҷ ниҳон омад
آن جان و جهان آمد وان گنج نهان آمد
Ваон фахр шаҳон омад то пардаи дарди мо ро
وان فخر شهان آمد تا پرده درد ما را
намеояд ва меояд он кас ки ҳаме бояд
میآید و میآید آن کس که همیباید
Ваз омаданаш шоядгар дил биҷаҳад мо ро
وز آمدنش شاید گر دل بجهد ما را
Шамс алҳақ табризӣ дар бурҷ ҳамл омад
شمس الحق تبریزی در برج حمل آمد
То бар шаҷари фитрати хуши хуши бпзди мо ро
تا بر شجر فطرت خوش خوش بپزد ما را