Мо на зон мҳтшмоним ки соғар гиранд
ما نه زان محتشمانیم که ساغر گیرند
Ва на зон мФлскон ки буз лоғар гиранд
و نه زان مُفلِسَکان که بُزِ لاغر گیرند
Мо аз он сӯхтагонем ки аз лиззати сӯз
ما از آن سوختگانیم که از لذّت سوز
Оби ҳайвони бҳлнду пай озар гиранд
آب حیوان بِهِلند و پیِ آذر گیرند
Чу ма аз равзан ҳар хона ки андар тобем
چو مه از روزنِ هر خانه که اندر تابیم
Аз зёи шаби сафатони ҷумлаи раҳ дар гиранд
از ضیا شبصفتان جمله رهِ در گیرند
Ноумедон ки фалаки соғар эшон бишикаст
ناامیدان که فلک ساغرِ ایشان بشکست
Чу бибинанди рухи мо тараб аз сар гиранд
چو ببینند رخ ما طرب از سر گیرند
Он ки зин ҷуръа кашад ҷумла ҷаҳонаш накушуд
آن که زین جرعه کِشد جمله جهانش نکِشد
Магар ӯро ба гилӣм аз бар мо баргиранд
مگر او را به گلیم از برِ ما برگیرند
Ҳар кӣ ӯ гарм шуд ин ҷо нашавад ғарраи кас
هر کی او گرم شد این جا نشود غرّهٔ کس
Агараш срдмзоҷони ҳама дар зар гиранд
اگرش سردمزاجان همه در زر گیرند
Дар фурӯбанд ва бидиҳ бода ки он вақт расед ,
در فروبند و بده باده که آن وقت رسید،
Зрдрўёни туро , ки меаҳмар гиранд
زردرویان تو را، که می احمر گیرند
Ба яке даст май холис имон нӯшанд
به یکی دست میِ خالصِ ایمان نوشند
Ба яке даст дигар парчам кофар гиранд
به یکی دستِ دگر پرچمِ کافر گیرند
Об моием ба ҳар ҷо ки бигардади чархӣ
آب ماییم به هر جا که بگردد چرخی
Авд моием ба ҳар сур ки миҷмар гиранд
عود ماییم به هر سور که مجمر گیرند
Пас ин пардаи азрақи санамии маи рўиист
پسِ این پردهٔ ازرق صنمی مهروییست
Ки зи нури Рахши анҷуми ҳама зевар гиранд
که ز نورِ رخش انجم همه زیور گیرند
зи эҳтироқоту зи трбиъ ва наҳваст барраанд
ز احتراقات و ز تربیع و نحوست برَهند
Агар ӯро саҳарии гӯша чодар гиранд
اگر او را سحری گوشهٔ چادر گیرند
Ту дўроӣу дўдлӣу дили софи онҳо рост
تو دورای و دودلیّ و دلِ صاف آنها راست
Ки дили худ бҳлнду дил дилбар гиранд
که دل خود بهلند و دل دلبر گیرند
Хамаш эй ақли Уторид ! ки дар ин маҷлиси ишқ
خمش ای عقلِ عطارد! که در این مجلسِ عشق
Ҳалқаи Зуҳраи баёнати ҳама тсхр гиранд
حلقهٔ زهره بیانت همه تسخر گیرند