Оҳи кони тӯтии дил бешкрстон чаҳ кунад
آه کان طوطی دل بیشکرستان چه کند
Оҳи кони булбули ҷон бегулу бустон чаҳ кунад
آه کان بلبل جان بیگل و بستان چه کند
Онк аз нақди висоли ту ба як ҷӯ нарасед
آنک از نقد وصال تو به یک جو نرسید
Чу гуҳи арз буд бар сари мизон чаҳ кунад
چو گه عرض بود بر سر میزان چه کند
Онки баҳри ту чу хошок ба як сӯаши афканд
آنک بحر تو چو خاشاک به یک سوش افکند
Чу биҷӯянд аз ӯ гавҳари имон чаҳ кунад
چو بجویند از او گوهر ایمان چه کند
Нақши гармобаи зи гармоба чаҳ лиззат ёбад
نقش گرمابه ز گرمابه چه لذت یابد
Дар тмошогаҳи ҷони сӯрат беҷон чаҳ кунад
در تماشاگه جان صورت بیجان چه کند
Бо баду неки баду неки маро корӣ нест
با بد و نیک بد و نیک مرا کاری نیست
Дили ташнаи лаби ман дар шаби ҳиҷрон чаҳ кунад
دل تشنه لب من در شب هجران چه کند
Дасту поу пару боли дил ман мунтазиранд
دست و پا و پر و بال دل من منتظرند
То ки ишқаш чаҳ кунад ишқи ҷузи эҳсон чаҳ кунад
تا که عشقش چه کند عشق جز احسان چه کند
Онк ӯ даст надорад чаҳ баради рӯзи нисор
آنک او دست ندارد چه برد روز نثار
Ва онк ӯ пой надорад гуҳи хезон чаҳ кунад
و آنک او پای ندارد گه خیزان چه کند
Онк бар пардаи ушшоқи дилаш знглаҳ нест
آنک بر پرده عشاق دلش زنگله نیست
Пардаи зеру ироқӣу сипоҳон чаҳ кунад
پرده زیر و عراقی و سپاهان چه کند
Онк аз бодаи ҷони гӯшу сараш гарм нашуд
آنک از باده جان گوش و سرش گرم نشد
Сарду афсурдаи миёни сафи мисатон чаҳ кунад
سرد و افسرده میان صف مستان چه کند
Онк чун шер наҷуст аз сифати гиреҳгии хеш
آنک چون شیر نجست از صفت گرگی خویش
Чашми оҳўФкни Юсуфи канъон чаҳ кунад
چشم آهوفکن یوسف کنعان چه کند
Гарчи фиръавн ба дар риш мурассаъ дорад
گرچه فرعون به در ریش مرصع دارد
ӯ ҳадис чу дар Мӯсои умрон чаҳ кунад
او حدیث چو در موسی عمران چه کند
Онк ӯ луқма ҳирсаст ба тамаъи хомӣ
آنک او لقمه حرص است به طمع خامی
ӯ дами исо ва ё ҳикмати луқмон чаҳ кунад
او دم عیسی و یا حکمت لقمان چه کند
Бас куну ҷамъи шӯ ва беш пароканда магӯ
بس کن و جمع شو و بیش پراکنده مگو
Бе дили ҷамъи ду се ҳарфи парешон чаҳ кунад
بی دل جمع دو سه حرف پریشان چه کند
Шамси табризи тӯии субҳи шикаррези тӯй
شمس تبریز توی صبح شکرریز توی
Ошиқи рӯз ба шаби қиблаи пинҳон чаҳ кунад
عاشق روز به شب قبله پنهان چه کند