Рўбҳкии дунбаи баради шери магари хуфта буд
روبهکی دنبه برد شیر مگر خفته بود
Ҷони набарди худ зи шери рӯбаҳи кӯру кабӯд
جان نبرد خود ز شیر روبه کور و کبود
Қосид раҳ дод шери вар на кӣ бовар кунад
قاصد ره داد شیر ور نه که باور کند
Ин чаҳ ки рӯбоҳи ланги дунбаи зи ширии рабӯд
این چه که روباه لنگ دنبه ز شیری ربود
Гуяд гиреҳгӣ бихӯрад Юсуфи ёқӯб ро
گفت که گرگی بخورد یوسف یعقوب را
Шери фалаки ҳам бар ӯ панҷа наёрад гушӯд
شیر فلک هم بر او پنجه نیارد گشود
Ҳар нафаси илҳоми ҳақи ҳорси дилҳои мост
هر نفس الهام حق حارس دلهای ماست
Аз дили мо кӣ баради майманаи деви ҳасуд
از دل ما کی برد میمنه دیو حسود
Даст ҳақ омад дароз бо кафи ҳақи кажи мбоз
دست حق آمد دراز با کف حق کژ مباز
Дар раҳи ҳақ ҳар кӣ кошт донаи ҷӯи ҷӯи дуруд
در ره حق هر که کاشت دانهٔ جو، جو درود
Ҳар ки туро кард хори рӯ ба худояш сипор
هر که تو را کرد خوار رو به خدایش سپار
Ҳар кӣ бтрсондт рӯй ба ҳақи ори зуд
هر کی بترساندت روی به حق آر زود
Ғуссау тарс ва бало ҳаст каманди худо
غصه و ترس و بلا هست کمند خدا
Гӯши кашони орадати ранҷ ба даргоҳи ҷӯад
گوش کشان آردت رنج به درگاه جود
Ёрб ва ёрб кунон рӯй сӯии осмон
یارب و یارب کنان روی سوی آسمان
Оби зи дидаи равон бар рухи зардат чу равад
آب ز دیده روان بر رخ زردت چو رود
Сабзаи дамидаи зи об бар дилу ҷони хароб
سبزه دمیده ز آب بر دل و جان خراب
Субҳи кушодаи ниқоби злки явми алхлўд
صبح گشاده نقاب ذلک یوم الخلود
Гар сари фиръавнро дарди бадӣу бало
گر سر فرعون را درد بدی و بلا
Лофи худои куҷои дрдҳдии он ънўд
لاف خدایی کجا دردهدی آن عنود
Чун дам ғарқаш расед гуфт ақали алъбид
چون دم غرقش رسید گفت اقل العبید
Куфр шуд имон ва дид чунк бало рӯ намӯд
کفر شد ایمان و دید چونک بلا رو نمود
Ранҷи зи тани брмдор дар так нилаши дрор
رنج ز تن برمدار در تک نیلش درآر
То тани фиръавни вор пок шавад аз ҷҳўд
تا تن فرعون وار پاک شود از جحود
Нафас ба Мисраст амир дар так ниласт асир
نفس به مصرست امیر در تک نیلست اسیر
Бош бар ӯ Ҷабраили дӯди баровари зи авд
باش بر او جبرئیل دود برآور ز عود
Авд бахиласт ӯ бӯ нарасонад ба ту
عود بخیلست او بو نرساند به تو
Роз нахоҳад гшо то накушуд нору дӯд
راز نخواهد گشا تا نکشد نار و دود
Муфаххар табриз гуфт шамси ҳақ ва дайн наҳуфт
مفخر تبریز گفت شمس حق و دین نهفت
Рӯи турш аз туаст ишқ сирка нишоед фузуд
رو ترش از توست عشق سرکه نشاید فزود