Пер тариқат гуяд : худоёи ҷалоли иззати ту ҷой ишорат нагузошту маҳву исботи ту роҳи азоФти бардошт то кам гашти ончии банда дар даст дошт , худованд аз ан ту мефузуд ва зон раҳе ( банда ) май кост то охир он монад ки аввал буд рост !
پیر طریقت گوید: خدایا جلال عزت تو جای اشارت نگذاشت و محو و اثبات تو راه اضافت برداشت تا کم گشت آنچه بنده در دست داشت، خداوند از ان تو میفزود و زان رهی (بنده) می کاست تا آخر آن ماند که اول بود راست!
Меҳнати ҳама дар ниҳоди обу гули мост
محنت همه در نهاد آب و گل ماست
Пеш аз дилу гул чаҳ буд он ҳосили мост
پیش از دل و گل چه بود آن حاصل ماست
Худованди ҷаббору ғаффори аввали бандаро дар дарёии кашфи ҷалол ба мавҷи даҳшат ғарқ кунад то дар ғалабаи инс аз худ раҳо шавад то ҷоӣӣ ки тан сабр барнатобаду дил бо ақли напардозаду назари тамизро напояду басони мисатони бўодии даҳшати сари дрнҳди ташнау саргардони гуҳии гирёни гуҳи хандон на фароғатӣ ки дил рамида бозҷӯед венаи мусоидӣ ки бахти худ бо вай боз гуяд ва ба забони инкисор ба сифати аФтқор ҳаме гуяд : худовандо ин сӯзи мо имрӯз дардомезаст на тоқати сари бурдан на ҷой гурезаст худоёи ин чаҳ теғаст ки чунин тезаст , на ҷои ором ва на ҷой парҳезаст , кримои манзили мо чунин давраст ҳамроҳони баргаштанд ки ин кор ғурурастгар манзили мо сарвараст ин интизор сураст ва ин меҳнати болои меҳнати нури алӣ нур аст
خداوند جبار و غفار اول بنده را در دریای کشف جلال به موج دهشت غرق کند تا در غلبه انس از خود رها شود تا جائی که تن صبر برنتابد و دل با عقل نپردازد و نظر تمیز را نپاید و بسان مستان بوادی دهشت سر درنهد تشنه و سرگردان گهی گریان گه خندان نه فراغتی که دل رمیده بازجوید ونه مساعدی که بخت خود با وی باز گوید و به زبان انکسار به صفت افتقار همی گوید: خداوندا این سوز ما امروز دردآمیز است نه طاقت سر بردن نه جای گریز است خدایا این چه تیغ است که چنین تیز است، نه جای آرام و نه جای پرهیز است، کریما منزل ما چنین دور است همراهان برگشتند که این کار غرور است گر منزل ما سرور است این انتظار سور است و این محنت بالای محنت نور علی نور است
Боз ба назари лутф дар миёни ҷон банда нигараду банда аз он скр бҳўш ояд орамида алтофи анояту афрӯхтаи нур мшоҳдт гардад , аз худ бози рустау дунёу охират аз пеш ӯ бархеста ба насими инси зиндаи вёдгори азалии дидау шодӣ ҷовдон ёфта гуяд : худоё , гоҳ аз ту мегуфтаму гоҳ май ниўшидму миёни лутфи туу ҷурм худ меандешедам ва кашидам ончӣ кашидам ҳамаи нӯши гашт чун овоӣ ту шунидам
باز به نظر لطف در میان جان بنده نگرد و بنده از آن سکر بهوش آید آرمیده الطاف عنایت و افروخته نور مشاهدت گردد، از خود باز رسته و دنیا و آخرت از پیش او برخاسته به نسیم انس زنده ویادگار ازلی دیده و شادی جاودان یافته گوید: خدایا، گاه از تو می گفتم و گاه می نیوشیدم و میان لطف تو و جرم خود می اندیشیدم و کشیدم آنچه کشیدم همه نوش گشت چون آوای تو شنیدم