эй аФсҳи замонаи фасеҳӣ ки ақли кул

ای افصح زمانه فصیحی که عقل کل

Имрӯз бо ту зубда ӣ Эрон кунад хитоб

امروز با تو زبدهٔ ایران کند خطاب

Дар лафзи тозаи фикри ту чун рӯҳ дар бадан

در لفظ تازه فکر تو چون روح در بدن

Дар дайри куҳнаи табъи ту чун ншоءи шароб

در دِیر کهنه طبع تو چون نشئهٔ شراب

Ҳал кардаам ғўомзи ҳикмат ба ҳимматат

حل کرده‌ام غوامض حکمت به هّمتت

Лекин бикуна ин нарасидам ба ҳеҷ боб

لیکن به کُنهِ این نرسیدم به هیچ باب

Кин как кӯ таҳаст бадви ангушт чун кашад

کاین کلک کوتهت به دو انگشت چون کشد

Аз рӯй шоҳидони баланди сухани ниқоб

از روی شاهدان بلند سخن، نقاب

Дар ғайбати ту хасм кунад даъвии ҳунар

در غیبت تو خصم کند دعوی هنر

Вндр ҳузур бошад помоли эҳтиҷоб

وندر حضور، باشد پامال احتجاب

Ореи ҷаҳони тамом ба хуршед равшан аст

آری جهان تمام به خورشید روشن است

Аммо ситораи пӯш буд нури офтоб

اما ستاره‌پوش بود نور آفتاب

Сар бар хати ту аҳли ҳунар чун қалам ниҳанд

سر بر خط تو اهل هنر چون قلم نهند

Кандар қаламрави ҳунарии молики алрқоб

کاندر قلمرو هنری مالک الرقاب

Бурҳони қотеъи ҳунари ин бас ки подшоҳ

برهان قاطع هنر این بس که پادشاه

Аз аҳли илму фазли туро карда интихоб

از اهل علم و فضل تو را کرده انتخاب

Омад бмни зи зодаи калаки ту қитъа Эй

آمد به من ز زادهٔ کلک تو قطعه ای

Вари лафз қитъа гӯям дар мъниши китоб

ور لفظ قطعه گویم در معنیش کتاب

Ҳар байти он қасидае аз шеъри мунтахаб

هر بیت آن قصیده‌ای از شعر منتخب

Ҳар сатри он сафинае аз лўлўии хўшоб

هر سطر آن سفینه‌ای از لولوی خوشاب

Мазмуни қитъаи неки дурӯғи сети ин ки ман

مضمون قطعه نیک دروغ‌ست این که من

Бад гуфтаам туро накунам ман бади иртикоб

بد گفته‌ام تو را نکنم من بد ارتکاب

эй ҷилваи гоҳи табъи ту болои осмон

ای جلوه‌گاه طبع تو بالای آسمان

Венаи нусхаи замири туро нуқтаи офтоб

وین نسخه ضمیر تو را نقطه آفتاب

Донам бади ман артў дурӯғасту ифтиро

دانم بد من از تو دروغ است و افترا

Чун ранҷиши ман аз ту блошку артёб

چون رنجش من از تو بلاشک و ارتیاب

Гирам буд саҳеҳ ва шунидам ба гӯши худ

گیرم بود صحیح و شنیدم به گوش خود

Чун ранҷам аз ту банда ва ранҷидани алъҷоб

چون رنجم از تو بنده و رنجیدن العجاب

Ту субҳи анварӣу дами рӯҳ парварат

تو صبح انوری و دم روح‌‌پرورت

Бошад насими субҳ чаҳ дар лутф ва чаҳ итоб

باشد نسیم صبح چه در لطف و چه عتاب

Ман ғунчаам шукуфта шавам аз насими субҳ

من غنچه‌ام شکفته شوم از نسیم صبح

На зулфи дилбарам ки даройам ба печу тоб

نه زلف دلبرم که درآیم به پیچ و تاب

Ҳқо накардаам гилаи ин илтифоти ту

حقا نکرده‌ام گله این التفات تو

Шояд ки аз суоли муқаддар буд ҷавоб

شاید که از سوال مقدّر بود جواب

Охири збзри шикваи хуршед кӣ расад

آخر ز بذر، شِکوهٔ خورشید کی رسد

ё худ чаро шикоят дарё кунад саҳоб

یا خود چرا شکایت دریا کند سحاب

Зинҳо ҷамеъи мигзрм калла карда ам

زین‌ها جمیع می‌گذرم کله کرده‌ام

Гӯям дақиқа Эй бишинав ин дақиқа ёб

گویم دقیقه‌ای بشنو این دقیقه یاب

Гӯйанд дӯстони гила аз дӯстон кунанд

گویند دوستان گله از دوستان کنند

Ва имрӯзи дӯст мунҳасираст андарони ҳаёт

و امروز دوست منحصرست اندر آن حباب

Ҳошои ман аз душман худ кардамӣ гила

حاشا که من ز دشمن خود کردمی گله

Аз бахт тира кардамӣу чархи носавоб

از بخت تیره کردمی و چرخ ناصواب

Кӯтаҳ кунам ҳадис ки наздики нуктаи санҷ

کوته کنم حدیث که نزدیک نکته سنج

Тӯли сухан ҷавоб набошад буд азоб

طول سخن جواب نباشد بود عذاب