Ризои қлихон эй хоҷае ки аз сари сидқ
رضا قلیخان ای خواجه ای که از سر صدق
Фиканда амри ту чун бандаи ҳалқа дар гӯшам
فکنده امر تو چون بنده حلقه در گوشم
Ҳануз май вздми буии машку гул ба машом
هنوز می وزدم بوی مشک و گل به مشام
Аз он шабӣ ки чу ҷон будӣ андари оғӯшам
از آن شبی که چو جان بودی اندر آغوشم
Бғири бандагӣу меҳру сидқ ва як рангӣ
بغیر بندگی و مهر و صدق و یک رنگی
Чаҳ кардаам ки з дил кардае фаромӯшам
چه کرده ام که ز دل کرده ای فراموشم
Маро ба ҳеҷ фурӯшӣ вале хӯрам савганд
مرا به هیچ فروشی ولی خورم سوگند
Ки мўӣӣ аз ту ба тоҷ мулӯк нафурӯшам
که موئی از تو به تاج ملوک نفروشم
Маро чу барбати худ дон кат ояд андари гӯш
مرا چو بربط خود دان کت آید اندر گوش
Тарона аз задани захму молаши гӯшам
ترانه از زدن زخم و مالش گوشم
Агар на барбатам эй ҷон чаро зи захми ҳабиб
اگر نه بربطم ای جان چرا ز زخم حبیب
Тарона хонам ва аз каси таронаи нниўшм
ترانه خوانم و از کس ترانه ننیوشم
Агар на барбатам эй дил чаро ба зонуии ту
اگر نه بربطم ای دل چرا به زانوی تو
Сухан сароему давр аз ту бар ту хомӯшам
سخن سرایم و دور از تو بر تو خاموشم
Агар на барбатами ин тори зарду мӯии сипед
اگر نه بربطم این تار زرد و موی سپید
з чист рехта бар доман аз баннои гӯшам
ز چیست ریخته بر دامن از بنا گوشم
Ҷаҳонёнро раги зер пӯст бошад ва ман
جهانیان را رگ زیر پوست باشد و من
Чу барбатам ки ба раги пӯстро ҳамеи пӯшам
چو بربطم که به رگ پوست را همی پوشم
Чу барбатам ки дилами ошнои захм ту шуд
چو بربطم که دلم آشنای زخم تو شد
Чу барбатам ки чу бинавозем ту бхрўшм
چو بربطم که چو بنوازیم تو بخروشم
Ту рӯзу шаби паии озор ман бакӯш ки ман
تو روز و شب پی آزار من بکوش که من
Паии ризои ту аз ҷону дил ҳаме кӯшам
پی رضای تو از جان و دل همی کوشم
Мхри фасонаи ин осмони ҳиялати боз
مخر فسانه این آسمان حیلت باز
зи роҳ ҳила Маяфкан ба хоби харгӯшам
ز راه حیله میفکن به خواب خرگوشم