Омад ъшўр ва дар ҳамаи мотам гирифта аст

آمد عشور و در همه ماتم گرفته است

Оҳи ин чаҳ мотамаст ки олам гирифта аст

آه این چه ماتم است که عالم گرفته است

Моҳ муҳаррам омаду бегонаро чаҳ ғам

ماه محرم آمد و بیگانه را چه غم

Кин барқ ба синаи муҳаррам гирифта аст

کاین برق به سینه محرم گرفته است

Зон мондааст ташнаи ҷигари хоки Карбало

زان مانده است تشنه جگر خاک کربلا

Каз хӯни аҳли байти набии нам гирифта аст

کز خون اهل بیت نبی نم گرفته است

Зон ғам ки гашти оби Фурот аз ҳусайни давр

زان غم که گشت آب فرات از حسین دور

Тӯфони ғусса дар дили замзам гирифта аст

طوفان غصه در دل زمزم گرفته است

Баст аз ҳусайни об ва бсг медиҳад язид

بست از حسین آب و بسگ میدهد یزید

Ин саг бибин ки сӯрати одам гирифта аст

این سگ ببین که صورت آدم گرفته است

Сӯзи дили кабоби ҳусайнаш чаҳ ғам буд

سوز دل کباب حسینش چه غم بود

Мастӣ ки худ шароби дамодам гирифта аст

مستی که خود شراب دمادم گرفته است

Ҳалқӣ бурид шимури лъин каз насим ӯ

حلقی برید شمر لعین کز نسیم او

Бӯеаст инки исои Марям гирифта аст

بویی است اینکه عیسی مریم گرفته است

Бар найза нест сурхии хӯн аз сари ҳусайн

بر نیزه نیست سرخی خون از سر حسین

Котши бҷони найзау парчам гирифта аст

کآتش بجان نیزه و پرچم گرفته است

Новак заданд бар дили тифлӣ ки аз аташ

ناوک زدند بر دل طفلی که از عطش

Пайкони обдор ба марҳам гирифта аст

پیکان آبدار به مرهم گرفته است

Касро маҷоли нутқи дарин доварӣ куҷост

کس را مجال نطق درین داوری کجاست

Рӯҳи алқудси дарин суханаши дам гирифта аст

روح القدس درین سخنش دم گرفته است

Ҳалқӣ ки ташна дам обӣаст чун хӯрд

حلقی که تشنه دم آبیست چون خورد

Теғӣ ки заҳри оби зи арқм гирифта аст

تیغی که زهر آب ز ارقم گرفته است

Зон ҳар муҳаррамаст ҷаҳон то ҷаҳони сиёҳ

زان هر محرم است جهان تا جهان سیاه

Кони офтоби моҳи муҳаррам гирифта аст

کان آفتاب ماه محرم گرفته است

Танҳо дар миёнаи мо шӯр ин азост

تنها در میانه ما شور این عزاست

Кин шӯр дар замину замони ҳам гирифта аст

کاین شور در زمین و زمان هم گرفته است

Зини дӯди синаҳо ки баромади аҷаби мадор

زین دود سینه ها که برآمد عجب مدار

Гар тирагӣ дар оинаи ҷам гирифта аст

گر تیرگی در آینه جم گرفته است

Пайдост ҳоли гиряи шабҳои то буруз

پیداست حال گریه شبهای تا بروز

Дар сабзаи зори чарх ки шабнам гирифта аст

در سبزه زار چرخ که شبنم گرفته است

Симурғи вор гум шуд азин ғуссаи хуррамӣ

سیمرغ وار گم شد ازین غصه خرمی

Каз қоф то бҳқоФи ҷаҳони ғам гирифта аст

کز قاف تا بهقاف جهان غم گرفته است

То хуррамӣ намӯд язид аз азои шоҳ

تا خرمی نمود یزید از عزای شاه

Морои кудурат аз дили хуррам гирифта аст

مارا کدورت از دل خرم گرفته است

Дунёи бад-ӣни хариди язиди ин харӣ бибин

دنیا بدین خرید یزید این خری ببین

Кӯи тарки Юсуф аз паии дарҳам гирифта аст

کو ترک یوسف از پی درهم گرفته است

Гар зонка рӯи бқблаҳ язид оварад чаҳ суд

گر زانکه رو بقبله یزید آورد چه سود

Чун дар биравӣ қиблаи аъзам гирифта аст

چون در بروی قبله اعظم گرفته است

Ҷони язид кӣ раҳад аз оташи ҳаҷем

جان یزید کی رهد از آتش حجیم

Кўрои худои гирифтау маҳак гирифта аст

کورا خدا گرفته و محک گرفته است

Нагирифт чархи даст касеро бикдми об

نگرفت چرخ دست کسی را بیکدم آب

Кӯи дасти сад ҳазор чу ҳотам гирифта аст

کو دست صد هزار چو حاتم گرفته است

Чархи фалак ки роҳ ӯ наме барад

چرخ فلک که راه او نمی برد

Худро чунин баланду муаззам гирифта аст

خود را چنین بلند و معظم گرفته است

Аз бори миннати карам хонадон ӯст

از بار منت کرم خاندان اوست

Пушти фалак ки ҳамчуи камони хам гирифта аст

پشت فلک که همچو کمان خم گرفته است

Зон сипеҳри хӯни ҷигари гӯша аш бирехт

زان سپهر خون جگر گوشه اش بریخت

Ширӣ ки садҳазор чу рустам гирифта аст

شیری که صدهزار چو رستم گرفته است

Пайваста гарчи кори аҷали сайд кардан аст

پیوسته گرچه کار اجل صید کردن است

Сайдии чунин бдоми фано гирифта аст

صیدی چنین بدام فنا گرفته است

Ёрб бнўрти марқади шҳзодаҳ ӣӣ казу

یارب بنورت مرقد شهزاده یی کزو

Шамъи муроди шблӣу адҳам гирифта аст

شمع مراد شبلی و ادهم گرفته است

Каз лутфи аҳли байти набии ёваряши даҳ

کز لطف اهل بیت نبی یاوریش ده

Аҳлӣ ки гӯша аз ғами олам гирифта аст

اهلی که گوشه از غم عالم گرفته است