Намӯд бор дигар қомати хамидаи ҳилол

نمود بار دگر قامت خمیده هلال

Зиҳии хуҷаста ки омад бФоли давлати дол

زهی خجسته که آمد بفال دولت دال

Фитод нохуна дар чашми чарх аз маи нав

فتاد ناخنه در چشم چرخ از مه نو

Шафақ гушӯд аз он мъниши раги қиФол

شفق گشود از آن معنیش رگ قیفال

Бгрдн аз маи нави Тифли нави расидаи ид

بگردن از مه نو طفل نو رسیده عید

БдФъи чашм наад тавқи сим чун атфол

بدفع چشم نهد طوق سیم چون اطفال

Намӯд маи зи шафақи ҳамчуи чин ба пешонӣ

نمود مه ز شفق همچو چین به پیشانی

Ки моҳ рӯй марои срзнди зи ҷомаи ол

که ماه روی مرا سرزند ز جامه آل

Парӣ вшӣаст маи андари шафақ ки нанамояд

پری وشی است مه اندر شفق که ننماید

зи пой то басараши ғайри ёрау халхол

ز پای تا بسرش غیر یاره و خلخال

Намӯд моҳ бонагашт ҳар кас ва шодаст

نمود ماه بانگشت هر کس و شادست

Ки ҳаст сӯра навену алқлми мубораки фол

که هست سوره نون و القلم مبارک فال

Ҳилол нест даруни шафақ ки шери фалак

هلال نیست درون شفق که شیر فلک

Бхўни душмани фахри з ман занад чангол

بخون دشمن فخر ز من زند چنگال

Сипеҳри афзалу карами мейри саъди аддӣни асъад

سپهر افضل و کرم میر سعد الدین اسعد

Ки ёфт зубдаи аҳдаши фалаки бостқлол

که یافت زبده عهدش فلک باستقلال

з калак ӯст никуии арӯси иншо ро

ز کلک اوست نکویی عروس انشا را

Чунонкӣ рӯй нкўрои зи зевари хату хол

چنانکه روی نکورا ز زیور خط و خال

Аҷиб нест ки аз хоки роҳи мардум ро

عجیب نیست که از خاک راه مردم را

Рўоиҳи карам ӯ бар оварад чу ниҳол

روایح کرم او بر آورد چو نهال

Румузи аби ҳаёти онкии ҷон ҳаме бахшад

رموز اب حیات آنکه جان همی بخشد

зи хоки раҳгузараш ақл карда истидлол

ز خاک رهگذرش عقل کرده استدلال

Аё сипеҳри фазилати туе ки бар рӯят

ایا سپهر فضیلت تویی که بر رویت

Кушодааст дар фазли эзади мутаъол

گشاده است در فضل ایزد متعال

Зиришки даст ту шуд баҳр бе шуъӯри чунон

زرشک دست تو شد بحر بی شعور چنان

Ки дар даҳонаш Чехияоне ба пунбаи оби зулол

که در دهانش چکانی به پنبه آب زلال

Муъоризи ту куҷо бошадаш маҷоли сухан

معارض تو کجا باشدش مجال سخن

Ки дар ҷавоб ту бошад забони тӯтии лол

که در جواب تو باشد زبان طوطی لال

Куҷои бўсФи ту фикрам расад ки мисўзд

کجا بوصف تو فکرم رسد که میسوزد

эй фикри ман аз барқи ҳайраташи пару бол

همای فکر من از برق حیرتش پر و بال

Чаҳ эҳтиёҷ ки соил кунад суол чу нест

چه احتیاج که سایل کند سوال چو نیست

Замир ғайб намой ту ҳоҷаташи бсўол

ضمیر غیب نمای تو حاجتش بسوال

Ғубори хотирам аз чархи сусти пӯшам аз онк

غبار خاطرم از چرخ سست پوشم از آنک

Расад бдомн табъат мабод гирди малол

رسد بدامن طبعت مباد گرد ملال

Бадасти лутфи зи хоками магар ту бурдорӣ

بدست لطف ز خاکم مگر تو برداری

Чунин ки кард сипеҳрам чу хоки раҳи помол

چنین که کرد سپهرم چو خاک ره پامال

Ба меҳри байни сӯии аҳлӣ баровар аз хокаш

به مهر بین سوی اهلی بر آور از خاکش

Ки ӯст зарра ва ту офтоби бурҷи камол

که اوست ذره و تو آفتاب برج کمال

зи шеъри хеш хаҷал гаштаам бҳзрти ту

ز شعر خویش خجل گشته ام بحضرت تو

Ки бандаро чаҳ маҳали шеъри бандаро чаҳ маҷол

که بنده را چه محل شعر بنده را چه مجال

Дуои ҷон ту шуд вирди субҳу шоми маро

دعای جان تو شد ورد صبح و شام مرا

Баҳақи шоми фироқу баҳақи субҳи висол

بحق شام فراق و بحق صبح وصال

Ҳамеша то ки шабу рӯзу рӯз ва шаб бошад

همیشه تا که شب و روز و روز و شب باشد

Ба сайри чархи фалаки офтобу маи мау сол

به سیر چرخ فلک آفتاب و مه مه و سال