Маҳбӯби ман чаҳ ҳоҷати гуфтан буд ки кист

محبوب من چه حاجت گفتن بود که کیست

Чун офтоб бар ҳамаи равшан буд ки кист

چون آفتاب بر همه روشن بود که کیست

Кӯтаҳи назари мушоҳидаи барқ айш кард

کوته نظر مشاهده برق عیش کرد

Моро назар ба сӯхтаи хирман буд ки кист

ما را نظر به سوخته خرمن بود که کیست

Ҳоҷат ба қисса нест ки дар дил ки хонаи сохт

حاجت به قصه نیست که در دل که خانه ساخت

Кӯи худ аёни зи чоки дили ман буд ки кист

کو خود عیان ز چاک دل من بود که کیست

Чун пӯшами он ҳариф ки ҳамсояро чу шамъ

چون پوشم آن حریف که همسایه را چو شمع

Равшани зи равшанои равзан буд ки кист

روشن ز روشنایی روزن بود که کیست

Душман ба таъна гуфт ки аҳлии туро ки сӯхт ?

دشمن به طعنه گفت که اهلی ترا که سوخت؟

Зоҳири ҳам аз ҳикояти душман буд ки кист

ظاهر هم از حکایت دشمن بود که کیست