Наврӯзи ман аз талъат чун моҳи ту ид аст

نوروز من از طلعت چون ماه تو عید است

Наврӯзи бад-ӣни талъати фирӯз ки дидаст ?

نوروز بدین طلعت فیروز که دیده‌ست؟

Пеши ори қадаҳи соқӣ ва бурдор сари хам

پیش آر قدح ساقی و بردار سر خُم

Бигушоӣ дар айш ки дасти ту калид аст

بگشای در عیش که دست تو کلید است

Дар сайди гуҳи ишқ ба фитроки ббндтд

در صیدگه عشق به فتراک ببندتد

Ҳар сайд ки дар хӯни дили худ нтпидст

هر صید که در خون دل خود نطپیده‌ست

Бошад ки ту худ раҳм кунӣ вар на ҷаҳонӣ

باشد که تو خود رحم کنی ورنه جهانی

Савдоӣ ту пухтанд ва баҷое нараседаст

سودای تو پختند و به جایی نرسیده‌ست

Чун ғунчаи дилам фош кунад рӯзи қиёмат

چون غنچه دلم فاش کند روز قیامت

Зон ҷома ки пӯшидаи зи даст ту даридаст

زان جامه که پوشیده ز دست تو دریده‌ست

Фарҳод ки ҷон дод ба талхии паии ширин

فرهاد که جان داد به تلخی پی شیرین

Як зарраи азин чошнии мо нчшидаҳ аст

یک ذره ازین چاشنی ما نچشیده‌ست

Танҳо накушуд доғи маломати дили аҳлӣ

تنها نکشد داغ ملامت دل اهلی

Кас нест ки аз ишқи ту доғӣ накашида аст

کس نیست که از عشق تو داغی نکشیده‌ست