Ҳамчуи чанги афғони ман бе захми бедодии нхост

همچو چنگ افغان من بی‌زخم بیدادی نخاست

То раги ҷон аз ту нахарошид фарёдии нхост

تا رگ جان از تو نخراشید فریادی نخاست

Пеши ман бодаст оҳӣ кин ҳарифон май кашанд

پیش من باد است آهی کاین حریفان می‌کشند

Нолаи ҷони сӯзи ҳаргиз аз дили шодии нхост

ناله جان‌سوز هرگز از دل شادی نخاست

Модари айёми чндонки одамӣ май пурвирд

مادر ایام چندانک آدمی می‌پرورد

Аз канори одамии ҳаргизи призодии нхост

از کنار آدمی هرگز پریزادی نخاست

Аз ниёзи мо асирони ҳамчуи сарв озода анд

از نیاز ما اسیران همچو سرو آزاده‌اند

Чун ту дар гулзори хӯбии сарви озодии нхост

چون تو در گلزار خوبی سرو آزادی نخاست

Худ гирифтам дар чамани шамшоди хезади ҳамчуи ту

خود گرفتم در چمن شمشاد خیزد همچو تو

Чун рухи хуби ту ҳаргизи гули зи шамшодии нхост

چون رخ خوب تو هرگز گل ز شمشادی نخاست

Номи ҷони бахшат ки барад ? эй хусрави ширини даҳан

نام جان بخشت که برد؟ ای خسرو شیرین‌دهن

Каз пас ҳар санг дар кӯии ту Фарҳодии нхост

کز پس هر سنگ در کوی تو فرهادی نخاست

Бар дарат аҳлӣ нишаст ва хост , аз мардум бурид

بر درت اهلی نشست و خاست، از مردم برید

Бе қадати як лаҳза гар бинишаст бе бодии нхост

بی‌قدت یک لحظه گر بنشست بی‌بادی نخاست