Чу хат ба куштанам оварад лаъли хандонат
چو خط به کشتنم آورد لعل خندانت
Бикаш вагарна кунад бахти ман пушаймонат
بکش وگرنه کند بخت من پشیمانت
Гумон баранд ки Юсуфи з чаҳ бурун омад
گمان برند که یوسف ز چه برون آمد
Чу моҳи чеҳраи براردи сар аз гиребонат
چو ماه چهره برآرد سر از گریبانت
Ту каъбаи дилу ҷонӣу иди муштоқон
تو کعبه دل و جانی و عید مشتاقان
Заҳри канор буд сад ҳазор қурбонат
زهر کنار بود صد هزار قربانت
Знози сарви баланди ту ман аҷаб дорам
زناز سرو بلند تو من عجب دارم
Ки дасти кӯтаҳ ошиқ расад бдомонт
که دست کوته عاشق رسد بدامانت
зи гиряи домани мо муфлисон шавад пар дар
ز گریه دامن ما مفلسان شود پر در
Чу дарҷ дар бигушоед даҳони хандонат
چو درج در بگشاید دهان خندانت
Гарми бҳҷри кашии вари бўсл зинда кунӣ
گرم بهجر کشی ور بوصل زنده کنی
Аз он чаҳ суди туро ва азин чаҳ нуқсонат
از آن چه سود ترا و ازین چه نقصانت
зи ҳасани хати ту шояд ки сари буруни орад
ز حسن خط تو شاید که سر برون آرد
Ҳазор Юсуфи Миср аз чаҳ занхдонат
هزار یوسف مصر از چه زنخدانت
Саг дар ту бомед он буд аҳлӣ
سگ در تو بامید آن بود اهلی
Ки хок роҳ шавад зери пои дарбонат
که خاک راه شود زیر پای دربانت