Боварам ноед ки шуд дар пӯсти маҷнӯни сӯии дӯст

باورم ناید که شد در پوست مجنون سوی دوست

Ошиқи андари пӯст кӣ гунҷад ки бинад рӯй дӯст

عاشق اندر پوست کی گنجد که بیند روی دوست

Каъбаи васли ҳабиб аз роҳи навмидии талаб

کعبه وصل حبیب از راه نومیدی طلب

Ронкаҳи зини наздиктар роҳӣ набошад сӯии дӯст

رانکه زین نزدیکتر راهی نباشد سوی دوست

Саҷдаи орм бар нишони пой ӯ дар ҳар қадам

سجده آرم بر نشان پای او در هر قدم

Ҳар қадами миҳроби мақсӯдӣ буд дар кӯии дӯст

هر قدم محراب مقصودی بود در کوی دوست

Сол ҳо гардӣдаам паҳлу ба паҳлуи қуръаи вор

سال‌ها گردیده‌ام پهلو به پهلو قرعه وار

Бар умед онкӣ биншинам дамии паҳлавии дӯст

بر امید آنکه بنشینم دمی پهلوی دوست

Гарчи баҳр ӯ чу маҷнӯни гӯшаи гир аз оламам

گرچه بهر او چو مجنون گوشه گیر از عالمم

Гӯшаи чашмӣ кӯ надорад сӯии ман оҳӯии дӯст

گوشه چشمی کو ندارد سوی من آهوی دوست

Ҷони фидои шамъ аз он парвона месозад ки шамъ

جان فدای شمع از آن پروانه می سازد که شمع

Рост мемонад бсрўи қомати дилҷӯии дӯст

راست میماند بسرو قامت دلجوی دوست

Кӣ малик дар саҷдаи одам фурӯд ояд сараш

کی ملک در سجده آدم فرود آید سرش

Гарна миҳробаш буд тоқи хами абрӯии дӯст

گرنه محرابش بود طاق خم ابروی دوست

Дар хами чавгон бахт ояд марои гӯии мурод

در خم چوگان بخت آید مرا گوی مراد

Гар серумро ин шараф бошад ки гардад гӯии дӯст

گر سرم را این شرف باشد که گردد گوی دوست

Аз ду олам бар канорами ғайр аз он мӯии миён

از دو عالم بر کنارم غیر از آن موی میان

Пеши аҳлӣ аз ду олам ба буд як мӯии дӯст

پیش اهلی از دو عالم به بود یک موی دوست