Дило , зи тахти сулаймон касе чаҳ ёд дорад
دلا، ز تخت سلیمان کسی چه یاد دارد
Ки оқибати бабради боди ончии боди орад
که عاقبت ببرد باد آنچه باد آرد
Магари насими қабулам чу ғунча бинавозад
مگر نسیم قبولم چو غنچه بنوازد
Ки кори бастаи ман рӯй дар кушоди орад
که کار بسته من روی در گشاد آرد
Чу офтоб касе кӯи баланд ҳиммат шуд
چو آفتاب کسی کو بلند همت شد
зи санги хораи буруни гавҳари муроди орад
ز سنگ خاره برون گوهر مراد آرد
Агар на мастӣ ишқ оварад фаромӯшӣ
اگر نه مستی عشق آورد فراموشی
Бўсл дил наниҳад ҳаркии ҳиҷри ёди орад
بوصل دل ننهد هرکه هجر یاد آرد
Ба ним ҷуръаи айшӣ ки мекашӣ хўшбош
به نیم جرعه عیشی که میکشی خوشباش
Кигар зиёда кунӣ дардисари зиёди орад
که گر زیاده کنی دردسر زیاد آرد
Маноли аҳлӣ аз он ма ки дар шариъати ишқ
منال اهلی از آن مه که در شریعت عشق
Гуноҳ аз тарафи он буд ки дод орад
گناه از طرف آن بود که داد آرد