Шоми ғами дили хастагонро бе ту ҷон бар лаб расад
شام غم دلخستگان را بیتو جان بر لب رسد
Тира гардад рӯзи беморон чу вақт шаб расад
تیره گردد روز بیماران چو وقت شب رسد
Аз таби ғам чун нигарем ё насузам ҳамчуи шамъ
از تب غم چون نگریم یا نسوزم همچو شمع
Чун ба мағзи устихонами оташи он таб расад
چون به مغز استخوانم آتش آن تب رسد
Кӣ ба чашм ман расад аз хоки пояти серума Эй
کی به چشم من رسد از خاک پایت سرمهای
Чашм медорам ки гардӣ аз сам мураккаб расад
چشم میدارم که گردی از سم مرکب رسد
Ёр меҳмонаст соқӣ бидиҳ кин фурсатӣ аст
یار مهمانست ساقی بده کاین فرصتی است
Кӣ дигар дар хонаи бахти ман ин кавкаб расад
کی دگر در خانه بخت من این کوکب رسد
Ман чаҳ корам бо ҳадиси Юсуф зиндонӣ аст
من چه کارم با حدیث یوسف زندانی است
Бандаи он сарви озодам ки аз мактаб расад
بنده آن سرو آزادم که از مکتب رسد
Зоҳдо , май пеш соҳиб машрабаст оби ҳаёт
زاهدا، می پیش صاحب مشربست آب حیات
Ҳайф бошад оби ҳайвонгар ба бемашраб расад
حیف باشد آب حیوان گر به بیمشرب رسد
Мо куҷои аҳлӣу софи чашмаи нӯш аз куҷо
ما کجا اهلی و صاف چشمه نوش از کجا
Ҷуръаи ҷомии магар зон шӯхи ширин лаб расад
جرعهٔ جامی مگر زان شوخ شیرینلب رسد