Бар шамъи фалаки ҳасанати он лаҳза ки нози орад
بر شمع فلک حسنت آن لحظه که ناز آرد
Аз ҷилваи гуҳи нозаш бо хоки ниёзи орад
از جلوه گه نازش با خاک نیاز آرد
Гар тоири қудсиро бар холи ту чашм уфтад
گر طایر قدسی را بر خال تو چشم افتد
Аз сайри ҳақиқати рӯ дар доми муҷози орад
از سیر حقیقت رو در دام مجاز آرد
Ҷонбхши лабии дории кондм ки сухан гуяд
جانبخش لبی داری کاندم که سخن گوید
Аз водии хомӯшии сад гумшудаи бози орад
از وادی خاموشی صد گمشده باز آرد
эй золими кофари дили ваии кофари золими ху
ای ظالم کافر دل وی کافر ظالم خو
Доғи ту маро то кӣ дар сӯзу гудози орад
داغ تو مرا تا کی در سوز و گداز آرد
Ҳарчанд зи нози он ма озурда кунад дилҳо
هرچند ز ناز آن مه آزرده کند دلها
Аҳлии ту ниёзовар шояд ки биноз орад
اهلی تو نیاز آور شاید که بناز آرد