Чун ту гӯйии сухан , ин длшдаҳро гӯши куҷо
چون تو گویی سخن، این دلشده را گوش کجا
Дили куҷои ақли куҷои фаҳми куҷои ҳуши куҷо
دل کجا عقل کجا فهم کجا هوش کجا
Пои бӯсии зсгт гар диҳадам даст бас аст
پای بوسی زسگت گر دهدم دست بس است
Ман куҷои васли куҷои бӯсау оғӯши куҷо
من کجا وصل کجا بوسه و آغوش کجا
То ту дар ҷилваи ҳасанӣ чу гул эй сарви сеӣ
تا تو در جلوه حسنی چو گل ای سرو سهی
Булбули дил буд аз шавқи ту хомӯши куҷо
بلبل دل بود از شوق تو خاموش کجا
Ҷӯй хӯн меравад аз дидаам эй бод бигӯ
جوی خون میرود از دیدهام ای باد بگو
Ки шуд аз дидаам он сарви қбопўши куҷо
که شد از دیدهام آن سرو قباپوش کجا
Аҳлӣ аз васл ба ҳиҷрон шудае қонеъ , лек
اهلی از وصل به هجران شدهایی قانع، لیک
Талхии заҳри куҷои чошнии нӯши куҷо
تلخی زهر کجا چاشنی نوش کجا