Каси зинда кӣ аз ҳиҷри ту эй аҳд гусал монад
کس زنده کی از هجر تو ای عهد گسل ماند
Вари мондаам аз зиндагии хеш хаҷал монад
ور ماندهم از زندگی خویش خجل ماند
Нақши ман азин хонаи гули сайли Фношст
نقش من ازین خانه گل سیل فناشست
Дар хонаи дили нақши ту эй шамъ чгл монад
در خانه دل نقش تو ای شمع چگل ماند
Бо қад чу шохи гули ту сарв ба даъвӣ
با قد چو شاخ گل تو سرو به دعوی
Бархест чу дид он гули рухи пой бгл монад
برخاست چو دید آن گل رخ پای بگل ماند
Доғи дили ман лолаи сифат зон гули рух буд
داغ دل من لاله صفت زان گل رخ بود
Гул рафт маро аз назари он доғ бадал монад
گل رفت مرا از نظر آن داغ بدل ماند
Захми ҷигарами аҳлӣ аз айём нашуд ба
زخم جگرم اهلی از ایام نشد به
Захм дигарам дар дил аз он аҳд гусал монад
زخم دگرم در دل از آن عهد گسل ماند