эй марҳам ҳар синаи маҷрӯҳи лаби ту

ای شکرخای شده گوش از تو

Фарсӯдаи қадамҳои дилам дар талаби ту

رخ ماه آمده شب‌پوش از تو

Гум кард сари риштаи тадбири дилами боз

از لطافت چو خیالی که شبی

Дар турра ӣ сари гумшудаи булъаҷаби ту

پر نکرده‌ست کس آغوش از تو

Чун тор тарозаст шабу рӯзи тани ман

شام را غالیه در زلف ز توست

То бартарафи рӯз танидааст шаби ту

ماه را غاشیه بر دوش از تو

Чун лолаи дилами чеҳраи бхўни шаст чу бигирифт

ملک سلطان سپرم گر ببرم

Сабзаи тарафи чашма ӣ ҳайвони лаби ту

به دو بوسه من مدهوش از تو

Ман банда нависад бтўи султони кавокиб

سبز پوشان فلک مست شدند

То хусрави хубони ҷҳоншди лақаби ту

موی مشکین ز بر و دوش از تو

эй ҳури призодаҳ бар ин ҳасану тароват

چون تو ساقی شدی‌ام ساغر گفت

Аз одамиён нест ҳамоно нисбати ту

کآب حیوان ز من و نوش از تو

Дар сохтаам бо ғами ту , рӯй ҳамин аст

گریه می‌زد چو سخن می‌گفتی

Чун ҷузи зи ғам ман нафазояд тараби ту

عقل در بارگه گوش از تو

Бедоди се сола ки асир аз Ҳамадони барад

چون فروماند دل و هوش اثیر

Тақдири илоҳии баду боқии сабаби ту

عاریت خواست دل و هوش از تو