Васл шак нест ки дар май бояд
وصل شک نیست که در میباید
Ва зи миёни ҳиҷри бадар май бояд
وز میان هجر بدر میباید
Назар но гузаронаст бадваст
نظر ناگذرانست به دوست
Лек аз бахти назар май бояд
لیک از بخت نظر میباید
Хидматии ҷон бар ӯ барадам гуфт
خدمتی جان برِ او بردم گفت
Ба аз ин нақд дигар май бояд
به از این نقد دگر میباید
Агар аз васли сухани мигўӣӣ
اگر از وصل سخن میگویی
Сухан инаст ки зар май бояд
سخن اینست که زر میباید
Дили маро бар сар ин гуфт матарс
دل مرا بر سر این گفت مترس
Поимздти манам ар май бояд
پایمزدت منم ار میباید
Баси брўнқи сар ва корӣаст асир
بس به رونق سر و کاریست اثیر
Танзи носози ту дар май бояд
طنز ناساز تو در میباید