зи умрам бе ту дард дил фазояд
ز عمرم بیتو درد دل فزاید
Гар ин умрам набошад бе ту шояд
گر این عمرم نباشد بی تو شاید
Диламро дарди ту май бояду бас
دلم را درد تو میباید و بس
Аҷаби кӯро ҳаме роҳат наёяд
عجب کو را همی راحت نیاید
Марои ин ғам ки ҳаргиз кам мабодо
مرا این غم که هرگز کم مبادا
Биҳамдиллоҳ ки ҳрдм ме фазояд
بحمدالله که هردم میفزاید
Ба дасти ҳиҷри хешам боз додӣ
به دست هجر خویشم باز دادی
Ки то ҳрдми марои ранҷии намояд
که تا هردم مرا رنجی نماید
Агар лофӣ задам кони туами ман
اگر لافی زدم کان توام من
Бад-ӣни ҷурмам чаҳ молаш воҷиб ояд
بدین جرمم چه مالش واجب آید