Маст аз дирам даромад дӯши он маи тамом

مست از درم درآمد دوش آن مهِ تمام

Дар бар гирифтаи чанг ва ба каф барниҳода ҷом

در بر گرفته چنگ و به کف برنهاده جام

Бар рӯзи равшан аз шаб тира фиканда банд

بر روزِ روشن از شبِ تیره فکنده بند

Вази машки суда бар гули сӯрии ниҳодаи дом

وز مشکِ سوده بر گلِ سوری نهاده دام

Оҳанг паст карда ба савти ҳазини хеш

آهنگِ پست کرده به صوتِ حزینِ خویش

Шукри ҳамеи фишондаи зи ёқӯти лаъли фом

شکّر همی فشانده ز یاقوتِ لعل‌فام

Гуфтӣ ки лаъли нобу ақиқи гудохтаи сет

گفتی که لعلِ ناب و عقیقِ گداخته‌ست

Дар ҷом ӯ зи акси рух ӯ шароби хом

در جامِ او ز عکسِ رخِ او شرابِ خام

Бинишаст бар канори ману бода нӯш кард

بنشست بر کنارِ من و باده نوش کرد

Он моҳи срўқомт ва он срўкши хиром

آن ماهِ سروقامت و آن سروکش خرام

Гуфт : эй касе ки дар ҳамаи умр аз ҷафои чарх

گفت: ای کسی که در همه عمر از جفایِ چرخ

Бо ман шабӣ ба рӯз наёвардае ба ком

با من شبی به روز نیاورده‌ای به کام

Инак ман ва ту ва май лаълу сурӯд ва равад

اینک من و تو و میِ لعل و سرود و رود

Бе заҳмати расӯл ва фиристодани паём

بی زحمتِ رسول و فرستادنِ پیام

Бо чанг бар канори бади андари канори ман

با چنگ بر کنار بُد اندر کنارِ من

Махмур то ба субҳи сифед аз намози шом

مخمور تا به صبحِ سفید از نمازِ شام

Дар гӯшае ки кас набад огаҳи зи ҳоли мо

در گوشه‌ای که کس نبُد آگه ز حالِ ما

Зон ъушрат ба ғоят ва зон мастии тамом

زان عشرتِ به‌غایت و زان مستیِ تمام

На мутриб ва на соқӣ ва на ёр ва на ҳариф

نه مطرب و نه ساقی و نه یار و نه حریف

ӯ буду анварӣ ва май лаъли вассалом

او بود و انوری و میِ لعل والسلام