Дил рафт ва ин бтар бар дилбар наме расм
دل رفت و این بتر بر دلبر نمیرسم
Кон мекунам валек ба гавҳар наме расм
کان میکنم ولیک به گوهر نمیرسم
Дарвеш ҳол кард ғами ишқ ӯ маро
درویش حال کرد غم عشق او مرا
Зон дар висоли ёри тавонгар наме расм
زان در وصال یار توانگر نمیرسم
Боғи висолро ба ҳамаи ҳолҳо дуруст
باغ وصال را به همه حالها درست
Гмраҳ шудам з ҳиҷр бидон дар наме расм
گمره شدم ز هجر بدان در نمیرسم
Дорад висоли ёри яке пояи баланд
دارد وصال یار یکی پایهٔ بلند
Ореи маро чаҳ ҷурм буд бар наме расм
آری مرا چه جرم بود بر نمیرسم
Ҳиҷрон ёр ҳаст марогар висол нест
هجران یار هست مرا گر وصال نیست
Бо ӯ бсохтм чу ба дигар наме расм
با او بساختم چو به دیگر نمیرسم