Мқлўби лафзи порс ба тсҳиФ аз кафат
مقلوب لفظ پارس به تصحیف از کفت
Дорам тамаъ ки иллат бо ман з даст кӯаст
دارم طمع که علت با من ز دست کوست
ТсҳиФи қофия ки ба мисроъ охираст
تصحیف قافیه که به مصراع آخرست
Гар зм кунӣ бар ончии мсмост ҳам накӯаст
گر ضم کنی بر آنچه مسماست همنکوست
Он ду латифро симӣ ҳаст ҳам латиф
آن دو لطیف را سیمی هست هم لطیف
Вончш кунӣ ту қалб ба мқлўб ӯ ҳам ӯст
وانچش کنی تو قلب به مقلوب او هم اوست
Имрӯз агар аз ин се буруни орем ба ҷӯад
امروز اگر از این سه برون آریم به جود
Фардои зи шукр ҳар се буруни ормати зи пӯст
فردا ز شکر هر سه برون آرمت ز پوست