зи раии сӯии Ҳамадони рахти басту бори кушод
ز ری سوی همدان رخت بست و بار گشاد
Ягонаи роди тақии зодаи бузурги ниҳод
یگانه راد تقیزادهٔ بزرگنهاد
Забон шудам зи забони тамом то гӯям
زبان شدم ز زبان تمام تا گویم
Ба пешгоҳи ту пайғоми ҷамъ то афрод
به پیشگاه تو پیغام جمع تا افراد
Хуш омадӣ з хуш омад гузаштаи ҳамаи кас
خوش آمدی ز خوش آمد گذشته همه کس
Ба сони мавкиби гули мақдамати мубораки бод
به سان موکب گل مقدمت مبارک باد
Баҳори баҳри пазирои ту густарда аст
بهار بهر پذیرایی تو گسترده است
Бисоти сабзаи зи Урдӣбиҳишт то хурдод
بساط سبزه ز اردیبهشت تا خرداد
Ба гулбунони дабистони дониш ҳамчун гул
به گلبنان دبستان دانش همچون گل
Шукуфтаи гаштии рӯяти шукуфтаи рӯҳати шод
شکفته گشتی رویت شکفته روحت شاد
Миёни миллати Эрон ва Амрико кард
میان ملت ایران و آمریکا کرد
Худ ин вуруди ту рӯҳи ягонагии эҷод
خود این ورود تو روح یگانگی ایجاد
Қавӣ бимонад он давлати қавии бунён
قوی بماند آن دولتِ قویبنیان
Ҷавони зайди зи нави ин миллати куҳани бунёд
جوان زید ز نو این ملت کهنبنیاد
зи партгоҳи сияҳи рӯзи шоми гумроҳӣ
ز پرتگاه سیهروز شام گمراهی
зи нури субҳ маориф бихоҳ истимдод
ز نور صبح معارف بخواه استمداد
Ба рӯзгори нажодӣ ки дод дониш дод
به روزگار نژادی که داد دانش داد
Чаҳ шуд ки гашти з бе донишии нижанди нажод
چه شد که گشت ز بیدانشی نژند نژاد
Чу бум шавам аз он марзу буми хезади ҷаҳл
چو بوم شوم از آن مرز و بوم خیزد جهل
эй дониш дар кишварӣ ки тухми ниҳод
همای دانش در کشوری که تخم نهاد
Ба сарнигӯнии заҳҳоки ҷаҳл чира шавад
به سرنگونیِ ضحّاک جهل چیره شود
Ҳамеша илм аз ин пас чу Коваи ҳаддод
همیشه علم از این پس چو کاوهٔ حداد
Хароби кишвари Эрони зи дасти мадрисаи гашт
خراب کشور ایران ز دست مدرسه گشت
Магари дубораи з дорулфунӯн шавад обод
مگر دوباره ز دارالفنون شود آباد
Барои сарфи маорифи маҳал ба ҷузи авқоф
برای صرف معارف محل به جز اوقاف
Набӯд ва нест ман ин гуфтам ҳар чаҳ бодобод
نبود و نیست من این گفتم هر چه باداباد