Ҷаври ин қадар ба як тан танҳо наме шавад

جور این قدر به یک تن تنها نمی‌شود

Гӯйӣ агар ки мешавад ҳошо наме шавад

گویی اگر که می‌شود حاشا نمی‌شود

Золимтар аз табиату мазлӯмтар зи ман

ظالم‌تر از طبیعت و مظلوم‌تر ز من

То хатми офариниш дунё наме шавад

تا ختم آفرینش دنیا نمی‌شود

эй табъи ман зи зиштии кирдори рӯзгор

ای طبع من ز زشتی کردار روزگار

Гуё дигар забони ту гуё наме шавад

گویا دگر زبان تو گویا نمی‌شود

Гӯйанд гиряи уқдаи дил боз ме кунад

گویند گریه عقده دل باز می‌کند

Хӯн гиря мекунам дили ман вонмӣ шавад

خون گریه می‌کنم دل من وانمی‌شود

Бунёнами ашки дидаи з ҷо кунад эй аҷаб

بنیانم اشک دیده ز جا کند ای عجب

Кин сайли кӯҳкани з чаҳ дарё наме шавад

کاین سیل کوهکن ز چه دریا نمی‌شود

Бо дарди ҳиҷри сохта дар чанги ғами асир

با درد هجر ساخته در چنگ غم اسیر

Корӣ ба нақди сохта аз мо наме шавад

کاری به نقد ساخته از ما نمی‌شود

Ном ту гашта вирди забонам вале чаҳ суд

نام تو گشته ورد زبانم ولی چه سود

Ширин , даҳан ба гуфтан ҳалво наме шавад

شیرین، دهن به گفتن حلوا نمی‌شود

Раҷъат агар дубора кунад зи осмони Масеҳ

رجعت اگر دوباره کند ز آسمان مسیح

Дардӣаст дарди ман ки мудово наме шавад

دردی است درد من که مداوا نمی‌شود

Хоки тамоми олам агар ман ба сар кунам

خاک تمام عالم اگر من به سر کنم

Дар хоки рафтаи ман пайдо наме шавад

در خاک رفته من پیدا نمی‌شود

Аз баъди марги ёри зи ман гӯ ба зиндагӣ

از بعد مرگ یار ز من گو به زندگی

Дигари сулӯки мо ва ту як ҷо наме шавад

دیگر سلوک ما و تو یک جا نمی‌شود

Орифи чунон зи мотами абдураҳими хон

عارف چنان ز ماتم عبدالرحیم خان

Гаштааст бистарӣ ки дигар по наме шавад

گشته است بستری که دگر پا نمی‌شود